
अगर 21 वर्ष से कम है लिव इन पार्टनर, तो पुलिस और माता-पिता को सूचित करेगी उत्तराखंड सरकार! UCC में प्रावधान
AajTak
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के तहत लिव-इन जोड़ों और विवाह के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है. सरकार के मुताबिक, लिव-इन का पंजीकरण ऑनलाइन मोबाइल ऐप और ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.
उत्तराखंड सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप को औपचारिक रूप से मान्यता देने और विनियमित करने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किया है. इसका उद्देश्य लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देश और सुरक्षा स्थापित करना है. प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के तहत, उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को निवास की परवाह किए बिना, अपने स्थानीय रजिस्ट्रार को संबंध विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है.
इसी तरह, राज्य के बाहर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग अपने संबंधित क्षेत्र के रजिस्ट्रार के साथ पंजीकरण कराने का विकल्प चुन सकते हैं.
21 साल से हैं तो रजिस्ट्रार पुलिस को देगा सूचना
नियम के अनुसार, यदि एक पार्टनर की उम्र 21 साल से कम है, तो रजिस्ट्रार को अनिवार्य रूप से पुलिस को सूचित करना होगा और प्रस्तुत बयान प्राप्त करने पर माता-पिता को सूचित करना होगा. हालांकि, विवाहित लोगों, अन्य लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों, नाबालिगों, या जबरदस्ती, जबरन या धोखाधड़ी वाली सहमति वाले रिश्तों में रहने वाले लोगों के लिए पंजीकरण निषिद्ध है. धारा 380 में इन रिश्तों को निषिद्ध के रूप में रेखांकित किया गया है. स्थानीय रीति-रिवाजों में जो रिश्ता लिव-इन जैसा समझा जाएगा, सरकार उसी को मान्यता देगी.
यह भी पढ़ें: लिव इन पार्टनर को लड़की ने चाकू से गोदा, खुद पुलिस को फोन लगाकर दे दी हत्या की खबर
यह विधेयक 5 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा में पेश किया गया और 7 फरवरी को तेजी से पारित हो गया, जिसका उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि कानून लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध नहीं करता है या किसी समुदाय को लक्षित नहीं करता है बल्कि समान नागरिक संहिता के तहत समावेशी है.

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.







