
'अगर बांग्लादेश में जमात आ जाती तो पाकिस्तान...', तारिक रहमान की जीत को भारत के लिए कैसा बता रहे एक्सपर्ट
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बांग्लादेश के 2026 संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 299 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे और अब वे बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. भारत ने तारिक रहमान की जीत पर बधाई दी है और दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने की उम्मीद जताई गई है.
बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया है. 12 फरवरी 2026 को हुए चुनाव में BNP ने जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी के गठबंधन को हराकर 299 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीती हैं जो दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है. नतीजों से साफ हो गया है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.
बांग्लादेश का ये चुनाव 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहला चुनाव है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से बांग्लादेश वापस लौटे हैं.
उनकी मां पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत के बाद उन्होंने बीएनपी की कमान संभाली है और वो 'Bangladesh First' नीति पर जोर दे रहे हैं, जिसमें लोकतंत्र, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और आर्थिक सुधार शामिल हैं.
बांग्लादेश में बीएनपी की जीत का भारत पर क्या असर होगा?
बांग्लादेश और भारत अहम व्यापारिक साझेदार हैं. दोनों देशों के बीच 4,096 किमी लंबी सीमा है और भारत के पांच राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है. भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां भी बहती हैं. पाकिस्तान से विभाजित होकर बने बांग्लादेश की स्थापना में भारत का अहम योगदान रहा है. भारत बांग्लादेश का पारंपरिक दोस्त और सहयोगी रहा है. ये रिश्ते शेख हसीना के कार्यकाल में सबसे ज्यादा मजबूत रहे हैं.
तारिक रहमान और बीएनपी का भारत के साथ रिश्ता शेख हसीना के समय जितना करीबी नहीं रहा है. 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और उनके भारत में शरण लेने के बाद बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते खराब हुए हैं.

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