
Zomato Share: सिर्फ 2 करोड़ मुनाफा कमाने पर बना था मजाक, अब इस कंपनी ने किया कमाल... शेयर 11% भागा!
AajTak
पहली तिमाही के रिजल्ट आने के बाद एक ट्विटर यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा था, '2 करोड़ मुझसे ले लेता भाई, इतना घर-घर जाके खाना डिलीवर करने की क्या जरूरी थी.' जिसे जोमैटो के CEO दीपिंदर गोयल ने सकारात्मक रूप से लिया था.
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जब Zomato को केवल 2 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. तारीफ के साथ-साथ सोशल मीडिया पर मजाक भी बनाया गया था. लेकिन उस मजाक को जोमैटो के CEO दीपिंदर गोयल ने सकारात्मक रूप से लिया था. क्योंकि उन्हें पता था कि ये तो केवल आगाज है, कंपनी पहली बार घाटे से मुनाफे में आई थी. भले ही मुनाफा केवल 2 करोड़ रुपये का था, लेकिन कंपनी का उत्साह बढ़ाने के लिए ये काफी था.
तीन महीने पहले पहली तिमाही के रिजल्ट आने के बाद एक ट्विटर यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा था, '2 करोड़ मुझसे ले लेता भाई, इतना घर-घर जाके खाना डिलीवर करने की क्या जरूरी थी.' जिसके बाद इसपर दीपिंदर गोयल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'Tweet of the day. ROFL!'. अब दूसरी तिमाही में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है. जिसकी खूब चर्चा हो रही है और कंपनी का शेयर में भी तूफानी तेजी देखी जा रही है.
जोमैटो के शेयर में तूफानी तेजी
शुक्रवार को कारोबार के दौरान BSE पर Zomato का शेयर 11.63 फीसदी उछलकर 120 रुपये तक पहुंच गया, जो 52 वीक हाई है. उसके बाद मुनाफावसूली के चलते दिन कारोबार के आखिर में शेयर 8.28 फीसदी की मजबूती के साथ 116.40 रुपये पर बंद हुआ.
जोमैटो के शेयरों ने इस साल शानदार रिटर्न दिया है. 25 जनवरी 2023 को यह एक साल के निचले स्तर 44.35 रुपये पर था. इसके बाद महज 10 महीने में ही यह 170.57 फीसदी उछलकर आज यानी 3 नवंबर 2023 को यह एक साल के हाई 120 रुपये पर पहुंच गया.
Zomato Q2 Results शेयर में तूफानी तेजी के पीछे कंपनी की दूसरी तिमाही का दमदार प्रदर्शन है. जोमैटो (Zomato) लगातार दूसरी तिमाही मुनाफे में रही. दूसरी तिमाही में कंपनी को 36 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है, जबकि एक साल पहले समान अवधि में जोमैटो को 251 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था. वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 2 करोड़ का मुनाफा हुआ था.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












