
VP के नाम की स्पेलिंग गलत, एड्रेस का पता नहीं... जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज करते हुए राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन ने क्या-क्या कहा?
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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष के इस नोटिस को खारिज करते हुए इसे तथ्यों से परे बताया है. राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को सौंपे अपने फैसले में हरिवंश ने कहा कि नोटिस देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा कम करने और मौजूदा उपराष्ट्रपति धनखड़ की छवि खराब करने के लिए तैयार किया गया था.
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने की मांग के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया गया है. इस नोटिस को खारिज करते हुए कहा गया कि धनखड़ की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए जल्दबाजी में इसे तैयार किया गया है.
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष के इस नोटिस को खारिज करते हुए इसे तथ्यों से परे बताया है. राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को सौंपे अपने फैसले में हरिवंश ने कहा कि नोटिस देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा कम करने और मौजूदा उपराष्ट्रपति धनखड़ की छवि खराब करने के लिए तैयार किया गया था. बता दें कि विपक्षी दलों ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अनुच्छेद 67बी के तहत नोटिस दिया था.
नोटिस खारिज करते समय क्या-क्या कहा गया?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने नोटिस के बारे में कहा कि इसमें कई खामियां थीं. नोटिस को अधिक लापरवाह ढंग से तैयार किया गया है. इसमें कई तरह की त्रुटियां हैं. जैसे, नोटिस जिसे लिखा गया है, उसके नाम का उल्लेख नहीं है, यहां तक की पूरी याचिका में उपराष्ट्रपति के नाम की स्पेलिंग भी गलत है, इसके साथ संबंधित दस्तावेज संलग्न नहीं है. साथ ही बिना किसी प्रमाणिकता के मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इसे तैयार किया गया है. यह चिंताजनक है कि इस नोटिस को केवल उपराष्ट्रपति की छवि धूमिल करने के इरादे से तैयार किया गया है.
उपसभापति ने नोटिस खारिज करते हुए कहा कि यह नोटिस उचित फॉर्मेट में भी नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 90(सी) के प्रावधानों के मुताबिक कोई भी प्रस्ताव लाने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होता है. लेकिन संसद की कार्यवाही 20 दिसंबर को समाप्त हो रही है. ऐसे में नेता प्रतिपक्ष और अन्य सांसदों की ओर से दिया गया नोटिस स्वीकार्य नहीं है. यह नोटिस पूरी तरह से अनुचित, त्रुटियां से भरा हुआ और उपराष्ट्रपति की छवि खराब करने के लिए जल्दबाजी में लाया गया है. इस वजह से भी इसे खारिज किया जाता है.
बता दें कि राज्यसभा के सभापति को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस दिया जाना जरूरी होता है, जबकि संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर यानी आज समाप्त हो रहा है.

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