
VIDEO: कभी कैब का इमरजेंसी बटन चेक किया है? जब शख्स ने दबाया तो सामने आई हकीकत...
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इंस्टाग्राम क्रिएटर टाइगर कौल ने एक वीडियो में दिखाया कि एक टैक्सी में लगे SOS बटन काम नहीं कर रहा था. वह बताते हैं कि यह बटन खासकर महिलाओं और अकेले सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है, लेकिन अगर यह सही से काम नहीं करता तो यह सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.
एक इंस्टाग्राम वीडियो ने टैक्सियों में लगे SOS (आपातकालीन मदद) बटन की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में इंस्टाग्राम क्रिएटर टाइगर कौल दिखाते हैं कि उन्होंने एक कैब में सफर करते समय SOS बटन दबाया, लेकिन अलर्ट चालू होने के बजाय लाइट बंद हो गई, यानी सिस्टम काम नहीं कर रहा था. कौल का कहना है कि यह बटन खासकर महिलाओं और अकेले सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है, लेकिन अगर यह सही से काम ही न करे तो यह सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
SOS सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा इंस्टाग्राम क्रिएटर टाइगर कौल ने कैब ड्राइवर से पूछा कि SOS (आपातकालीन) सिस्टम लगवाने में कितना खर्च आया. ड्राइवर ने बताया कि इसे लगाने में उसे ₹17,000 लगे. कौल ने कहा, "अगर कोई महिला सोचती है कि यह सिस्टम उसे सुरक्षा देगा, तो यह सिर्फ एक धोखा है. कंपनियां ड्राइवरों को इतने महंगे उपकरण बेचती हैं, लेकिन वे सही से काम नहीं करते. यह धोखा यात्रियों के साथ भी है. कौल ने बताया कि यात्री जब कैब में बैठते हैं तो उन्हें लगता है कि SOS बटन दबाने पर तुरंत मदद मिलेगी. यह बटन जिसे पैनिक या इमरजेंसी बटन भी कहते हैं, कैब की सुरक्षा टीम या आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सूचित करता है. लेकिन अगर यह सिस्टम काम नहीं करता, तो सुरक्षा का भरोसा टूट जाता है और यात्रियों को खतरा हो सकता है.
इन जगहों पर इमरजेंसी बटन होना अनिवार्य दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में सुरक्षा नियमों के तहत, सभी टैक्सियों और ऐप-आधारित कैब में जीपीएस से जुड़े इमरजेंसी बटन होना अनिवार्य है. हालांकि, परिवहन यूनियनों ने बार-बार तकनीकी गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हुए कहा है कि कई एसओएस उपकरण वास्तव में आपात स्थिति में अधिकारियों को कभी सचेत नहीं करते हैं.
सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर हुई प्रतिक्रिया इस वीडियो के बाद यात्रियों के बीच चिंता बढ़ गई है, खासकर वे जो रात में या लंबी दूरी की यात्रा के दौरान इस तरह के सुरक्षा उपकरणों पर भरोसा करते हैं. एक यूजर ने लिखा, "सब कुछ सिर्फ कागज पर है, असल में हम फेल हो गए हैं." एक दूसरे ने कहा, "यह देखकर बहुत दुख हुआ कि हमारे अधिकारी महिला सुरक्षा में नाकाम हैं. syed_ali_izhar नाम के यूजर ने लिखा-भाई पुलिस स्टेशन में जाकर सबूत दिखा कर कुछ नई होरा बटन से क्या होगा .
the_common_biker नाम के यूजर ने लिखा- किसके क्षेत्र में घोटाला नहीं चल रहा है?? मुझे सच में लगता है कि हम इस तरह की चीजों के लायक हैं... जब तक कि हम संबंधित अधिकारियों के प्रशंसक बनने के बजाय उन्हें जवाबदेह बनाना शुरू न करें.
सालाना 17000 लगती है फीस एक और यूजर ने बताया कि ये SOS सिस्टम एक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता है, जिसमें सालाना ₹17,000 फीस लगती है. अगर डिवाइस काम करता भी है और कोई बटन दबाता है, तो पुलिस को सूचित होने में कम से कम 10 मिनट लगते हैं. पुलिस भी कैब ड्राइवर को ही पूछताछ के लिए बुलाती है क्योंकि मोबाइल नंबर उसी का रजिस्टर्ड होता है. उन्होंने कहा, "सोचिए अगर कोई महिला यात्री खतरे में हो और पुलिस चोर को फोन करके पूछे कि क्या वह चोरी कर रहा है, तो ये कितना खतरनाक होगा. "

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