
Vastu Tips: किचन में एक ही स्लैब पर है चूल्हा और सिंक? ऐसे दूर करें बड़ा वास्तु दोष
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Meta Description: क्या आपके किचन में चूल्हा और सिंक एक ही स्लैब पर हैं? वास्तु के मुताबिक यह एक बड़ा वास्तु दोष है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस वास्तु दोष को बिना तोड़-फोड़ किए बगैर ही ठीक किया जा सकता है.
Vastu Tips: जब भी हम अपना घर बनवाते हैं या किराए के घर में शिफ्ट होते हैं, तो रसोई घर की बनावट पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है क्योंकि इसका सीधा असर घर की खुशहाली और आर्थिक उन्नति पर पड़ता है. कई बार मकानों में जगह की कमी के कारण या अनजाने में चूल्हा और बर्तन धोने का सिंक एक ही स्लैब पर बना दिया जाता है. वास्तु शास्त्र के नजरिए से यह एक गंभीर खतरा है, जिसे 'अग्नि और जल' का विरोध माना जाता है.
वास्तु के जानकार के मुताबिक , चूल्हा 'अग्नि' का प्रतीक है जिसे दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए, जबकि सिंक 'जल' का प्रतिनिधित्व करता है. इसके लिए उत्तर-पूर्व दिशा सही है. जब ये दोनों एक ही स्लैब पर होते हैं, तो परस्पर विरोधी ऊर्जाओं का टकराव शुरू हो जाता है. नतिजनत घर के सदस्यों के बीच बढ़ते तनाव, स्वास्थ्य समस्याओं और बेवजह के आर्थिक खर्चों के रूप में सामने आता है.
बिना तोड़-फोड़ वास्तु दोष का निवारण यदि आपके किचन की बनावट ऐसी है कि आप सिंक या चूल्हे की जगह नहीं बदल सकते, तो बिना किसी तोड़-फोड़ के भी इसका समाधान मुमकिन है. इसके लिए आप चूल्हे और सिंक के बीच में लकड़ी का एक छोटा सा बोर्ड या पार्टीशन रख सकते हैं. इसके अलावा, दोनों के बीच में एक छोटा सा मनी प्लांट या कोई भी हरा पौधा रखना भी बहुत प्रभावी होता है, क्योंकि हरा रंग इन दोनों ऊर्जाओं के टकराव को शांत कर विकास के मार्ग खोलता है.
ऊर्जा संतुलन के दूसरे उपाय ऊर्जा के संतुलन के लिए वास्तु विशेषज्ञ चूल्हे और सिंक के मध्य में एक क्लियर क्वार्ट्ज क्रिस्टल या वास्तु पिरामिड रखने की सलाह भी देते हैं, जो नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है. इसके साथ ही, अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करना भी जरूरी है. हमेशा कोशिश करें कि बर्तन धोने के बाद सिंक को सूखा रखें और जब चूल्हा इस्तेमाल में न हो, तो उसे ढक कर रखें. यह छोटी सी सावधानी नकारात्मक ऊर्जा के संचार को रोकने में बड़ी भूमिका निभाती है. इसके अलावा रसोई घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए इन बातों का भी विशेष ध्यान रखें:

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












