
Vaishakh Month 2025: अक्षय तृतीय से बुद्ध पूर्णिमा तक, वैशाख के महीने में आएंगे ये व्रत त्योहार
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Vaishakh Month 2025: पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि नारद ने वैशाख को तीन सबसे शुभ महीनों (कार्तिक, माघ और वैशाख) में सर्वोत्तम बताया है. स्कंद पुराण में कहा गया है कि इन महीनों में किए गए स्नान, दान और पूजा से पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं.
Vaishakh Month 2025: वैशाख का पवित्र महीना रविवार, 13 अप्रैल यानी कल से शुरू हो रहा है. वैशाख हिंदू पंचांग का दूसरा महीना है. वैशाख का संबंध विशाखा नक्षत्र से है. इसलिए इसे वैशाख का महीना कहा जाता है. इस महीने को धन और पुण्य प्राप्ति के लिए बहुत उत्तम माना जाता है. इस महीने में पूजा-उपासना बहुत ही फलदायी होते है. भगवान विष्णु और परशुराम की उपासना इस महीने अत्यंत फलदायी होती है. इस बार वैशाख का महीना 13 अप्रैल से शुरू होकर 12 मई तक रहने वाला है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि नारद ने वैशाख को तीन सबसे शुभ महीनों (कार्तिक, माघ और वैशाख) में सर्वोत्तम बताया है. स्कंद पुराण में कहा गया है कि इन महीनों में किए गए स्नान, दान और पूजा से पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं. मान्यता हैं कि इस महीने ही भगवान परशुराम, नरसिंह और भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था.
वैशाख में आने वाले पर्व-त्योहार वैशाख में कई बड़े पर्व-त्योहार आते हैं. इसी महीने धन और सुख-समृद्धि प्राप्त करने का शुभ समय होता है. इसे महीने अक्षय तृतीया आती है, जिसमें सोना खरीदना और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है. वैशाख स्नान यानी पवित्र नदियों में स्नान आत्मा को शुद्ध करता है. यदि आस-पास नदी न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी उत्तम होता है.
वैशाख में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट 13 अप्रैल 2025- वैशाख माह की शुरुआत 14 अप्रैल 2025- मेष संक्रांति 16 अप्रैल 2025- संकष्टी चतुर्थी 24 अप्रैल 2025- वरुथिनी एकादशी 25 अप्रैल 2025- प्रदोष व्रत (कृष्ण) 26 अप्रैल 2025- मासिक शिवरात्रि 27 अप्रैल 2025- वैशाख अमावस्या 30 अप्रैल 2025- अक्षय तृतीया 1 मई 2025- विनायक चतुर्थी 3 मई 2025- गंगा सप्तमी 5 मई 2025- सीता नवमी 8 मई 2025- मोहिनी एकादशी 9 मई 2025- प्रदोष व्रत 11 मई 2025- नरसिंह जयंती 12 मई 2025- बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा व्रत 13 मई 2025- नारद जयंती, ज्येष्ठा माह शुरू
वैशाख माह में क्या करें? वैशाख माह में सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें. तुलसी पौधे और पीपल के पड़े की पूजा करनी चाहिए. गरीबों को पानी, कपड़े और भोजन, दान आदि करें. गीता पाठ करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.

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