
USA: भारतीय फैमिली के किडनैपिंग-मर्डर केस के मुख्य आरोपी ने कोर्ट से लगाई गुहार, कहा- मैं दोषी नहीं हूं
AajTak
अमेरिका के कैलिफोर्निया में तीन अक्टूबर को भारतीय मूल के एक सिख परिवार के चार लोगों का अपहरण कर लिया गया था. अपहरण के दो दिन बाद पांच अक्टूबर को परिवार के चारों लोगों के शव बरामद किए गए थे. मृतकों में आठ महीने की बच्ची भी थी. सीसीटीवी फुटेज से आरोपी की निशानदेही हो सकी, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया.
अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय मूल के चार सिखों के अपहरण और हत्या के मुख्य आरोपी ने अदालत से गुहार लगाई है कि वह दोषी नहीं है और उसे मामले में बाइज्जत बरी किया जाए. मुख्य आरोपी जीसस साल्गाडो को छह अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था. उस पर फर्स्ट डिग्री हत्या के चार आरोप लगाए गए हैं.
साल्गाडो पर इसी तरह के अपराध के पहले भी आरोप लगे हैं. उस पर पूर्व में आगजनी करने का भी आरोप लगाया गया है. यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसे बिना किसी पैरोल के अपनी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बितानी पड़ सकती है.
बता दें कि कैलिफोर्निया में तीन अक्टूबर को एक सिख परिवार के चार लोगों को अगवा कर लिया गया था. बाद में पांच अक्टूबर को चारों के शव बरामद किए गए थे.मृतकों में आठ महीने की अरूही धेरी, उसकी मां 27 साल की जसलीन कौर, उनके पिता 36 साल के जसदीप सिंह और 39 साल के अंकल अमनदीप सिंह हैं. साल्गाडो ने उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा किया था. साल्गाडो एक ट्रकिंग कंपनी का पूर्व कर्मचारी है.
साल्गाडो का आरोपों से इनकार
केएफसीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल्गाडो ने अदालत में इन सभी आरोपों से इनकार किया है. साल्गाडो को अब 15 दिसंबर को अदालत में पेश किया जाएगा.
दरअसल पुलिस ने आग मे धू-धूकर कर जलता हुआ अमनदीप का ट्रक तीन अक्टूबर को बरामद किया था. इसके बाद शुरू हुई पुलिस जांच में सिख परिवार के लापता होने का पता चला.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









