
US मिड टर्म इलेक्शन: रुझानों में ट्रम्प की पार्टी आगे, चुनावों में महंगाई और अबॉर्शन राइट्स का रहा शोर
AajTak
अमेरिकी मिड टर्म चुनाव को अमेरिकी संसद के निचले और ऊपरी सदन में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के वर्चस्व की लड़ाई माना जाता है. इसके जरिए दोनों सदनों के सदस्यों को चुना जाता है. इसके साथ ही राज्यों में गवर्नरों का चुनाव होता है. यह चुनाव राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए नाक का सवाल बन गया है.
अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन यानी मध्यावधि चुनाव के लिए मंगलवार को वोट डाले गए. अब तक के रुझानों में मतगणना के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन बाइडेन की डेमोक्रेट्स से आगे चल रही है. दुनियाभर में जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिका कई तरह की समस्याओं से जूझ रहा है. लेकिन इस बार चुनाव में महंगाई और गर्भपात सबसे बड़ा मुद्दा रहा. एडिसन रिसर्च के एग्जिट पॉल के मुताबिक, इसके बाद अपराध, इमिग्रेशन और गन पॉलिसी भी अहम मुद्दे रहे. अमेरिका बीते 40 साल में सबसे अधिक महंगाई की मार से जूझ रहा है.
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव को अमेरिकी संसद के निचले और ऊपरी सदन में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के वर्चस्व की लड़ाई माना जाता है. इसके जरिए दोनों सदनों के सदस्यों को चुना जाता है. इसके साथ ही राज्यों में गवर्नरों का चुनाव होता है. यह चुनाव राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए नाक का सवाल बने हुए है. चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की हार होने पर उंगलियां बाइडेन पर उठनी तय है. जबकि दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए भी यह चुनाव अहम माने जा रहे हैं.
चुनाव में महंगाई, गर्भपात अहम मुद्दे
मध्यावधि चुनाव में मतदाताओ का रुझान जानने के लिए कई सर्वे किए गए हैं. इसी तरह हुए एडिसन रिसर्च के सर्वे से पता चला है कि हर 10 में से छह वोटर्स ने गर्भपात को गैरकानूनी करार देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गुस्सा जाहिर किया. इन लोगों ने कहा कि देश में गर्भपात लीगल होना चाहिए. मतदाताओं ने कहा कि वे गर्भपात कानून को ध्यान में रखकर वोट करेंगे.
सर्वे में 10 में से लगभग तीन वोटर्स ने कहा कि उनके लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है और उन्होंने इसी को ध्यान में रखकर वोट किया है. 10 में से लगभग एक वोटर ने कहा कि वोटर करते हुए देश में बढ़ता क्राइम उनके दिमाग में रहा. 10 में से लगभग एक वोटर ने कहा कि उनके लिए इमिग्रेशन सबसे बड़ा मुद्दा है.
इन मतदाताओं ने कहा कि उनके लिए गन पॉलिसी सबसे अहम मुद्दा रहा. दस में से लगभग आठ मतदाताओं का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था खराब दौर से गुजर रही है जबकि दस में से लगभग दो वोटर्स ने कहा कि अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी है.

ईरानी मीडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के द्वीपों पर हमला हुआ तो वह 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट में एक नया मोर्चा खोल सकता है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच होने वाले तेल और गैस का अधिकांश ट्रांसपोर्टेशन इसी रास्ते से होता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट संघर्ष पर चिंता जताते हुए फ्रांसीसी राजनयिक जीन आर्नो को विशेष दूत नियुक्त किया है. उन्होंने कहा कि हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं और बड़े युद्ध का खतरा बढ़ रहा है. गुटेरेस ने शांति वार्ता को जरूरी बताते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर असर की चेतावनी दी. उन्होंने अमेरिका-इजरायल से युद्ध खत्म करने और ईरान व हिज़्बुल्लाह से हमले रोकने की अपील की.

ईरान जंग शुरु होते ही पाकिस्तान ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल में 55 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया. जनता के गुस्से को शांत करने के लिए शहबाज-मुनीर ने पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने का दांव खेला पाकिस्तान के लोगों का ही दावा है कि विदेशी मीडिया से पाकिस्तान के मध्यस्थ होने को लेकर खबरें छपवाईं. लेकिन ईरान ने पाकिस्तान हकीकत उसका होर्मुज से जहाज रोककर बता दी. अब पाकिस्तान के लोग ही पूछ रहे हैं कि जब हमारा एक जहाज होर्मुज पार नहीं कर सकता. तो हम मध्यस्थ क्या खाक बनेंगे.

इजरायल ने ईरान के इस्फहान स्थित नौसैनिक रिसर्च सेंटर पर हमला कर उसकी पनडुब्बी निर्माण क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. यह केंद्र नौसेना के लिए पनडुब्बियों और सिस्टम विकसित करने का प्रमुख ठिकाना था. इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है. दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की ओर मिसाइल दागने का दावा किया है.









