
US की यूनिवर्सिटी में रिसर्च, वहीं कर ली शादी... अब भारतीय छात्र पर हमास से संबंध का आरोप, होगा डिपोर्ट!
AajTak
अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी रिसर्च कर रहे भारतीय छात्र को हिरासत में लिया गया है. आरोप है कि छात्र ने सोशल मीडिया पर हमास का दुष्प्रचार और यहूदी-विरोधी भावना फैलाई है.
अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में छात्र वीजा पर पढ़ाई और रिसर्च कर रहे एक भारतीय छात्र, बदर खान सूरी, को अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है. आरोप है कि सूरी ने अमेरिकी विदेश नीति का विरोध किया है और उसका फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास से संबंध है. Reuters के अनुसार, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने सूरी पर यह आरोप लगाया है कि उसने सोशल मीडिया पर हमास का दुष्प्रचार किया है और यहूदी-विरोधी भावना फैलाने की कोशिश की है.
घर से बाहर से गिरफ्तार हुआ भारतीय छात्र
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सूरी की गतिविधियों के आधार पर यह कहा कि सूरी को डिपोर्ट किया जा रहा है. सूरी, जो एक भारतीय नागरिक हैं, छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और उन्होंने एक अमेरिकी नागरिक से शादी की है. उनके वकील के अनुसार, सूरी को लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया में हिरासत में लिया गया है, और वह अब आव्रजन अदालत में अपनी सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहे हैं. संघीय एजेंटों ने उन्हें सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उनके घर के बाहर से गिरफ्तार किया था.
Reuters के अनुसार, यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन विदेशियों को निर्वासित करने का अभियान चला रहे हैं जिन्होंने अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद गाजा में अमेरिकी सहयोगी इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था. ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई नागरिक अधिकारों और अप्रवासी वकालत समूहों के विरोध का कारण बनी है. इन समूहों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन अपने राजनीतिक विरोधियों को गलत तरीके से निशाना बना रहा है.
बदर खान सूरी जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में पोस्टडॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत हैं, जो विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस का हिस्सा है. उनकी गिरफ्तारी की खबर सबसे पहले पोलिटिको ने दी थी.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












