
UN में पहले भाषण, फिर शहबाज शरीफ सहित इस्लामिक नेताओं के साथ मीटिंग, क्या है ट्रंप का एजेंडा
AajTak
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का भाषण दुनियाभर में अमेरिकी धाक और आठ महीनों की सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित होगा.
अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वां सत्र इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. 22 सितंबर से शुरू हुआ यह सत्र 26 सितंबर तक चलेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने जा रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र में आज दो भाषण होंगे. ट्रंप भारतीय समयानुसार आज शाम 7.20 बजे संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगे. वह दूसरा भाषण UN Leader's Reception में देंगे. यह भाषण भारतीय समयानुसार कल सुबह लगभग पांच बजे होगा. इसके अलावा वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित इस्लामिक देशों के नेताओं के साथ बैठक करेंगे. यह बैठक भारतीय समयानुसार रात 12 बजे होगी.
वह यूएन महासभा से इतर इन मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे. इन देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मिस्र, जॉर्डन, तुर्किए, इंडोनेशिया और पाकिस्तान शामिल है. इस बैठक के दौरान गाजा संकट सुलझाने पर चर्चा हो सकती है.
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस बार की थीम Better Together: 80 Years and More for Peace, Development, and Human Rights है.
इससे पहले फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और बेल्जियम सहित कई देशों ने स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर फिलिस्तीन को मान्यता देने का ऐलान किया. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को कहा कि फ्रांस ने आधिकारिक तौर पर फिलिस्तीन राष्ट्र को मान्यता दे दी है. ये कदम संयुक्त राष्ट्र समिट के दौरान उठाया गया. इस तरह 2025 तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 155 देश ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी.
यह संख्या अप्रैल 2025 में 147 थी लेकिन सितंबर 2025 में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, माल्टा, मोनाको, एंडोरा, सैन मारीनो और आर्मेनिया जैसे देशों की हालिया घोषणाओं के बाद बढ़ी है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









