
Ukraine-Russia Conflict: रूस या अमेरिका - किसके साथ खड़ा होगा भारत?
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यूक्रेन की सीमा पर रूस की तरफ से हो रहे बेहिसाब धमाके खबर दे रहे हैं कि जंग की चिंगारी कभी भी भड़क सकती है. दुनिया पर छाए इस नए संकट में एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ अमेरिका. लेकिन सवाल ये है कि जिस रूस के रक्षा उपकरणों पर भारत दशकों तक निर्भर रहा है. क्या वो अमेरिका के पाले में खड़ा होकर पुतिन को नाराज करने का जोखिम उठा सकेगा? वो भी तब जब दोनों महाशक्तियों के नेता एक दूसरे को सीधे चुनौती दे रहे हैं. जुबानी जंग अगर असली जंग में तब्दील हो गई तो फिर भारत के लिए किसी का पक्ष लेना आवश्यक हो जाएगा. भारत को अगर चीन का सामना करना है तो उसके लिए अमेरिका और रूस दोनों के साथ साझीदारी की जरूरत होगी. तो अब किसे चुनेगा भारत?

ईरान ने अमेरिका से बढ़ती टकराव की स्थिति के बीच अपने संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत किया है. युद्ध के खतरे को देखते हुए नई सुरक्षा संरचनाएं और कंक्रीट की मज़बूत ढालें बनाई गई हैं ताकि सैन्य सुविधाओं को सुरक्षित रखा जा सके. हाल ही में मिल रही सैटेलाइट तस्वीरें साफ दर्शाती हैं कि ईरान ने अपने इस्फाहान न्यूक्लियर साइट पर खास कदम उठाए हैं, जो जून 2025 में अमेरिका के हमले के बाद से और अधिक सुदृढ़ किया गया है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शहबाज शरीफ को विश्व मंच पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करते हुए नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के पर्सनल असिस्टेंट जैसे व्यवहार करते देखा गया है. वीडियो और तस्वीरें स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि जब ट्रंप ने अपनी उंगली उठाई, तो शहबाज तुरंत अपनी कुर्सी से खड़े हो गए और जब ट्रंप ने इशारा किया तो वे आज्ञाकारी छात्र की तरह बैठ गए.

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने आजतक के साथ खास बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अच्छे रिश्तों के बारे में बताया और कहा कि मोदी से बात करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया की आवश्यकता नहीं होती, वे सीधे फोन पर बात कर लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के तंज भी उन्होंने दिए. साथ ही, महात्मा गांधी को अपने जीवन का आदर्श भी बताया जो उनके दृष्टिकोण और जीवनशैली का प्रतीक है.

मध्य पूर्व में बढ़ती अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच ईरान पर संभावित हमले की आशंकाएं तेज हैं. सीमित स्ट्राइक से लेकर शासन परिवर्तन, सैन्य शासन, क्षेत्रीय जवाबी हमले और होर्मुज स्ट्रेट में बाधा तक कई परिदृश्य सामने हैं. किसी भी कदम का असर सिर्फ ईरान नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.








