
'UCC को लेकर सिर्फ मुस्लिमों को क्यों डराया जाता है? जड़ों को देखें तो मुस्लिम सनातनी हैं'
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आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देश भर के मुसलमानों से जुड़ने के लिए "आओ जड़ों से जुड़ें" मुहिम को देश भर में शुरू कर दिया है, जिसका मकसद है जिस शिजरे (वंशावली) में पैदा हुए हैं उसकी खिदमत करें, हिफाजत करें और आगे बढ़ाएं.
आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देश भर के मुसलमानों से जुड़ने के लिए "आओ जड़ों से जुड़ें" मुहिम को देश भर में शुरू कर दिया है, जिसका मकसद है जिस शिजरे (वंशावली) में पैदा हुए हैं उसकी खिदमत करें, हिफाजत करें और आगे बढ़ाएं. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का मानना है कि भारतीय मुसलमान किसी बाहरी देश से आए मुसलमान नहीं हैं. सब यहीं के हैं और पहले सनातनी ही थे, जिन्होंने बाद में मजहब बदल कर अपना धर्म परिवर्तन किया है.
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'यूसीसी का हल्द्वानी में फैले दंगे से कुछ लेना देना नहीं' मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इन्द्रेश कुमार कहा कहना है कि यूसीसी का हल्द्वानी में फैले दंगे और हिंसा से कुछ लेना देना नहीं है. स्टेट के अनुसार अब यूसीसी का कानून बनाया जा रहा है. इसमें किसी भी जाति को लेकर प्रतिबंध नहीं है. अगर किसी को जन्मदिन मनाना है, या निकाह करना है, कोई रुकावट नहीं है. इसलिए उनकी सिक्योरिटी की गारंटी यूसीसी है. किसी की स्वतंत्रता का हनन नहीं. सिर्फ मुस्लिम कहते हैं गलत होगा, ये वोट बैंक की पॉलिटिक्स है, जिसमे मुस्लिम को टारगेट किया जाता है. राजनीतिक दलों को भड़काना बंद करना चाहिए. श्री राम, यूसीसी, तलाक, हिजाब, विवादित भूमि पर इबादतगाह, पूर्वजों, परम्पराओं, संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और भारतीयता के मुद्दों पर अहम फैसले लिए गए.
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"आओ जड़ों से जुड़ें" के दो दिनी कार्यशाला में वे मुसलमान भी थे जिन्होंने अयोध्या के श्री राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्शन किया था. उपस्थित लोगों ने राम को अपना पूर्वज मानते हुए जय सिया राम के नारे भी लगाए. मंच के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद अख्तर ने स्पष्ट रूप से कहा कि जड़ों से जुड़ें का अर्थ किसी तरह का धर्म परिवर्तन नहीं है. बल्कि यह इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी परम्पराओं और पूर्वजों से अधिक से अधिक जुड़ें. जनसंख्या के हिसाब से सबसे अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भारत का है. भूख से मुक्त हिंदुस्तान है. विदेशी ताकते हर समय दंगे करवाने की फिराक में रहती हैं. छुआछूत मुक्त हिंदुस्तान, दंगा मुक्ति हिंदुस्सांतान सांप्रदायिक तनाव से मुक्त भाईचारे वाला प्रदूषण मुक्त हिंदुस्तान मुसलमान और हिंदुओं ने मिलकर बनाया है.
'धर्म भले ही अलग है लेकिन हमारी जड़ें एक हैं' इंद्रेश कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि अगर अपने वंशावली (शिजरे) को जानेंगे तो पाएंगे कि कुछ जेनरेशन पहले हम कौन थे, हमारा गोत्र क्या था? हमारे पूर्वज का परिवार कहां है? परिवार के बाकी लोग कहां हैं? क्या कर रहे हैं? अगर उनसे मुलाकात को यथासंभव बनाएं तो हम खुद ब खुद देश की एकता अखंडता में विश्वास रखने वाले हो जायेंगे. धर्म भले ही अलग है लेकिन हमारी जड़ें एक हैं. वैसे भी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना.

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