
Somwati Amvasya 2024: साल की आखिरी अमावस्या आज? धन प्राप्ति के लिए जरूर करें ये उपाय
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पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पौष अमावस्या होती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का बहुत ही महत्व है. मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर पितरों का वास होता है. पौष अमावस्या पर पितरों के नाम से पीपल के पेड़ की पूजा करें. पीपल की जड़ में काले तिल डालकर और दूध व जल मिलाकर चढ़ाएं.
आज पौष अमावस्या है. यह साल की आखिरी अमावस्या है. दिन सोमवार होने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा. सूर्य और चन्द्रमा के एक साथ होने से अमावस्या की तिथि होती है. इसमें सूर्य और चन्द्रमा के बीच का अंतर शून्य हो जाता है. यह तिथि पितरों की तिथि मानी जाती है. इसमें चन्द्रमा की शक्ति जल में प्रविष्ट हो जाती है. इस तिथि को राहु और केतु की उपासना विशेष फलदायी होती है. इस दिन दान और उपवास का विशेष महत्व होता है. इस दिन विशेष प्रयोगों से विशेष लाभ होते हैं.
पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पौष अमावस्या होती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का बहुत ही महत्व है. मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर पितरों का वास होता है. पौष अमावस्या पर पितरों के नाम से पीपल के पेड़ की पूजा करें. पीपल की जड़ में काले तिल डालकर और दूध व जल मिलाकर चढ़ाएं. आमावस्या के दिन ऐसा करने से पितृगण प्रसन्न होते हैं. वह आपको संपन्नता का आशीर्वाद देते हैं. इस दिन शाम के समय पीपल के पेड़ पर सरसों का दीपक जलाएं और तुलसी के पेड़ पर घी का दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से पितरों की अनुकंपा बरसती है.
अमावस्या पर कैसे पाएं धन प्राप्ति का वरदान? इस दि एक ताम्बे के पात्र में चावल भरें. उत्तर दिशा की ओर चेहरा करके बैठें. ताम्बे का पात्र सामने रखें. उस पात्र के अगल बगल दो दीपक जला दें. अब ताम्बे के पात्र पर हाथ रखकर धन प्राप्ति की प्रार्थना करें. दीपक बुझ जाने के बाद ताम्बे के पात्र के मुख पर लाल कपडा बांध दें. इस बर्तन को संभालकर रक्खें. धन की स्थिति ठीक हो जाने पर पात्र सहित चावल का दान कर दें
महाउपाय
स्वास्थ्य समस्याओं से निजात खीर बनाकर शिवजी को अर्पित करें. कुछ अंश पितरों के नाम से भी निकालें. शिवजी को अर्पित की हुयी खीर निर्धनों में बांटें. पितरों की खीर किसी पशु को खिला दें. सफेद चन्दन की लकड़ी नीले धागे में बांधकर पहन लें.
पारिवारिक समस्या से मुक्ति स्नान करके नारंगी वस्त्र धारण करें. भगवान् शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें. उनके समक्ष "ॐ गौरीशंकराय नमः" का जप करें. सात्विक भोजन बनाकर दान करें.

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