
Silver Rate: 'सोने पे छाई महंगाई, मैं चांदी ले आई', लेकिन अब चांदी भी हाथ नहीं आएगी, 50 साल पहले था ये भाव!
AajTak
Silver 50 Years Price Chart: आने वाले वर्षों में भी चांदी की कीमतें थमने वाली नहीं है. क्योंकि ग्लोबल डिमांड बढ़ने वाली है. ज्वेलरी के साथ-साथ औद्योगिक इस्तेमाल में भी चांदी की जरूरत पड़ती है.
'मेरा तोहफा तू कर ले कुबूल, माफ करना हुई मुझसे भूल, क्योंकि सोने पे छाई महंगाई, मैं चांदी ले आई...', ये गाना करीब तीन दशक पुराना है. उस समय सोना (Gold) महंगा होने का हवाला देकर चांदी (Silver) लाने की बात कही जा रही है. लेकिन अब समय बदल चुका है, अब तो चांदी भी हाथ नहीं आने वाली है.
दरअसल, सोना तो महंगा है ही, लेकिन अब चांदी की कीमतों में जबर्दस्त तेजी देखी जा रही है. चांदी का भाव 100000 रुपये प्रति किलो को पार कर चुका है. सोना भी प्रति 10 ग्राम 90000 रुपये के करीब पहुंच चुका है. लेकिन जिस तेजी से चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, उससे हर कोई हैरान हैं. यही नहीं, आने वाले वर्षों में भी चांदी की कीमतें थमने वाली नहीं है. क्योंकि ग्लोबल डिमांड बढ़ने वाली है. ज्वेलरी के साथ-साथ औद्योगिक इस्तेमाल में भी चांदी की जरूरत पड़ती है.
अब चांदी की कीमतों में भारी उछाल
सोना-चांदी निवेश का एक बेहतरीन विकल्प है. इस सोने तो संकट का सहारा कहा जाता है. लेकिन अब चांदी पर लोगों का ज्यादा फोकस है. लेकिन अब चांदी खरीदना भी हर किसी के लिए संभव नहीं है. एक किलो चांदी के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा चुकाने होंगे.
पिछले एक साल में चांदी की कीमतों में खासी तेजी आई है. हालांकि चांदी की कीमत में पिछले 50 वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 70 के दशक में चांदी की कीमत काफी कम थी. साल 1975 में चांदी की औसत कीमत करीब 2000-2500 रुपये प्रति किलो थी. उस समय वैश्विक बाजार में चांदी की कीमत करीब 4-5 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस थी.
आज की तारीख (19 मार्च 2025) को देखें तो भारत में चांदी की कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति किलो है. इसका मतलब है कि पिछले 50 वर्षों में चांदी की कीमत में नाममात्र रूप से (nominal terms) लगभग 40-50 गुना बढ़ोतरी हुई है. हालांकि भारत में पिछले 50 वर्षों में औसत मुद्रास्फीति दर 7-8% सालाना रही है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












