
Russia-Ukraine War: Nuclear War Alert, Russia के पास बचा है सिर्फ 14 दिन का गोला-बारूद!
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हर गुजरते दिन के साथ Russia-Ukraine war ज्यादा Dangerous होती जा रही है. दोनों तरफ जानमाल का नुकसान बढ़ता जा रहा है. राजधानी कीव का किला अभी भी मजबूती से टिका हुआ है. लेकिन इस बीच एक ऐसी खबर आई है जो किसी भी सेना का मनोबल तोड़ सकती है. ये खबर रूस के गोला बारूद स्टॉक से जुड़ी हुई है. British Secret Agencies के हवाले से ये बात सामने आई है कि रूस के पास अब सिर्फ 14 दिन का गोला-बारूद बचा है. अगर यूक्रेन ये युद्ध 2 हफ़्तों तक खींच लेता है तो रूस की सेना के लिए कीव पर कब्जा करना उतना मुश्किल हो जाएगा. लेकिन यहीं पर सबसे कठिन सवाल उठता है कीव सुरक्षित, पुतिन परेशान अब युद्ध में आगे क्या?

ईरान ने अमेरिका से बढ़ती टकराव की स्थिति के बीच अपने संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत किया है. युद्ध के खतरे को देखते हुए नई सुरक्षा संरचनाएं और कंक्रीट की मज़बूत ढालें बनाई गई हैं ताकि सैन्य सुविधाओं को सुरक्षित रखा जा सके. हाल ही में मिल रही सैटेलाइट तस्वीरें साफ दर्शाती हैं कि ईरान ने अपने इस्फाहान न्यूक्लियर साइट पर खास कदम उठाए हैं, जो जून 2025 में अमेरिका के हमले के बाद से और अधिक सुदृढ़ किया गया है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शहबाज शरीफ को विश्व मंच पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करते हुए नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के पर्सनल असिस्टेंट जैसे व्यवहार करते देखा गया है. वीडियो और तस्वीरें स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि जब ट्रंप ने अपनी उंगली उठाई, तो शहबाज तुरंत अपनी कुर्सी से खड़े हो गए और जब ट्रंप ने इशारा किया तो वे आज्ञाकारी छात्र की तरह बैठ गए.

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने आजतक के साथ खास बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अच्छे रिश्तों के बारे में बताया और कहा कि मोदी से बात करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया की आवश्यकता नहीं होती, वे सीधे फोन पर बात कर लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के तंज भी उन्होंने दिए. साथ ही, महात्मा गांधी को अपने जीवन का आदर्श भी बताया जो उनके दृष्टिकोण और जीवनशैली का प्रतीक है.

मध्य पूर्व में बढ़ती अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच ईरान पर संभावित हमले की आशंकाएं तेज हैं. सीमित स्ट्राइक से लेकर शासन परिवर्तन, सैन्य शासन, क्षेत्रीय जवाबी हमले और होर्मुज स्ट्रेट में बाधा तक कई परिदृश्य सामने हैं. किसी भी कदम का असर सिर्फ ईरान नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.








