
Russia-Ukraine War: NATO नेताओं ने की मुलाकात, बाइडेन ने कहा- यूक्रेन को रक्षा मदद देते रहेंगे
AajTak
Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध को एक महीना होने को आया है. दोनों देशों के बीच छिड़ी यह जंग रोजाना एक नए आयाम पर पहुंच रही है. रूस लगातार यूक्रेन के तमाम बड़े शहरों, टीवी टावरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है.
यूक्रेन पर रूस के हमले की शुरुआत के एक महीने बाद आज गुरुवार को नाटो नेताओं ने ब्रसेल्स में मुलाकात की है. इस समूह में शामिल देशों के नेताओं ने कहा कि वे यूक्रेन का, रूसी हमले से लड़ने और आत्मरक्षा के अधिकार को बनाए रखने के लिए सुरक्षा सहायता के साथ समर्थन करना जारी रखेंगे.
वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर नाटो महासचिव ने कहा कि रूस NATO के लिए सीधा खतरा नहीं है. उन्होंने रूस से तुरंत युद्ध रोकने और बेलारूस में यूक्रेन के साथ बातचीत करने की अपील की है. NATO महासचिव ने यह भी कहा कि यूक्रेन को सीधा मदद नहीं देंगे. दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन को लगातार रक्षा मदद देते रहेंगे. गौरतलब है कि रूस यूक्रेन की बीच भीषण जंग को एक महीना हो गया. दुनिया भर के देशों की ओर से शांति की अपील के बाद भी कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं. रूसी फौज ने यूक्रेन के उत्तर-पश्चिमी शहर रिवने में बने आर्म्स डिपो पर अंधाधुंध हमला किया है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने खुद हमले का वीडियो जारी किया है. रूस के दावे के मुताबिक, हमले में आर्म्स डिपो में मौजूद यूक्रेन के घातक हथियारों को नष्ट कर दिया गया है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने मुताबिक लंबी दूरी की मिसाइल के जरिये यूक्रेन के आर्म्स डिपो को समंदर से सटीक निशाना बनाया गया.
वहीं यूक्रेन से जंग के बीच रूस की तरफ से एक बार फिर परमाणु हमले की धमकी दी गई है. 24 घंटे में यह उसकी दूसरी धमकी है. अब संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप राजदूत दिमित्री पोलांस्की ने परमाणु बमों का जिक्र किया है. इससे पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता ने यह बात कही थी.
ये भी पढ़ें:

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









