
Russia-Ukraine War: यूक्रेन पर टूट रहे रूसी कहर की बड़ी वजह राष्ट्रपति जेलेंस्की भी! जानें क्यों उठ रहे सवाल
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USSR से टूटकर बना यूक्रेन रूस का बड़ा पड़ोसी है और अपने सूरक्षा कारणों से वो उसे अपने साथ रखना चाहता है. लेकिन यूक्रेन को यूरोपियन यूनियन से प्यार है और उसकी तमन्ना नाटो देशों में शामिल होने की है, जो पुतिन को नागवार है. रूस लगातार यूक्रेन को नाटो में शामिल न होने की धमकी दे रहा था, लेकिन अमेरिका की शह पर यूक्रेन रूस को आंख दिखाता रहा. इसका नतीजा ये हुआ कि पुतिन ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. जिस वोलोडिमिर जेलेंस्की को पश्चिमी मीडिया हीरो बनाने में लगा है वो भी दूध के धुले नहीं हैं. अमेरिका की प्रतिष्ठित राजनीतिक मैगजीन नेशनल इंटरेस्ट में जेलेंस्की सरकार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी. इस रिपोर्ट में यूक्रेन की सरकार के कई कदमों पर सवाल खड़े किए गए थे. देखें ये रिपोर्ट.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.








