
RJD की राह में बाधा बने ओवैसी, जानिए बिहार में तेजस्वी को 5 साल तक कैसे रुलाते रहेंगे
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बिहार में भले ही असदुद्दीन ओवैसी सरकार बनाने और बिगाड़ने की ताकत न हासिल कर सके हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव के लिए किसी तुरुप का इक्का से कम नहीं हैं. ओवैसी अपने पांच विधायकों के दम पर आरजेडी को 2030 तक यानी अगले चार साल में सियासी प्रेशर बनाने का दांव आजमाते रहेंगे.
बिहार के विधानसभा चुनाव नतीजों ने राज्य के सारे सियासी गेम को ही बदलकर रख दिया, जिसका प्रभाव सिर्फ सत्ता बनाने तक नहीं बल्कि 2030 तक बिहार के राजनीतिक भविष्य की दशा और दिशा को तय कर दिया है. AIMIM प्रमख असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पांच सीटें जीतकर भले ही सरकार बनाने और बिगाड़ने वाले खेल के किंगमेकर न बन सके हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव के लिए तुरुप का इक्का हैं.
बिहार की पांच राज्यसभा चुनाव के लिए 16 मार्च को वोटिंग है, जिसे लेकर सियासी तानाबाना बुना जाने लगा है. विधायकों की संख्या के आधार पर एनडीए आसानी से चार राज्यसभा सीट जीत लेगा और पांचवी सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है, लेकिन उसके लिए सभी विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा. आरजेडी के राज्यसभा की राह में सबसे बड़ी बाधा ओवैसी की पार्टी बन गई है.
राज्यसभा की पांचवीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए आरजेडी मुस्लिम दांव खेलने की रणनीति बना रही थी ताकि ओवैसी का समर्थन हासिल किया जा सके. लेकिन ओवैसी की पार्टी ने अलग ही शर्त लगा दी है. AIMIM ने आरजेडी को चेतावनी दी है कि 2030 तक गठबंधन नहीं तो कोई राज्यसभा सांसद नहीं. ओवैसी के समर्थन लिए बिना राजद का राज्यसभा चुनाव जीतना नामुमकिन है?
ओवैसी की AIMIM कैसे बनी किंगमेकर बिहार विधानसभा में 243 विधायक है, जिसमें से मौजूदा समय मे एनडीए के पास 202 विधायकों का आंकड़ा है जबकि महागठबंधन के पास मात्र 35 विधायक हैं. बिहार की राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों के वोट का समर्थन चाहिए, इस लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी. दो सीटें बीजेपी और दो सीटें जेडीयू के खाते में जाती दिख रही हैं.
एनडीए को 41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीत के लिए 164 विधायक ही लगेंगे. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और उसे पांचवी राज्यसभा को सीट जीतने के लिए उसे तीन विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत है.
आरजेडी की राह में ओवैसी बने बाधा बिहार विधानसभा में एक सीट बसपा के पास, पांच सीटें AIMIM और एक सीट आईआईपी के पास है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी किंगमेकर के रोल में है, जिसको समर्थन करेगी, उसकी जीत तय है. एनडीए अगर ओवैसी की पार्टी का समर्थन हासिल कर लेती है तो पांचवीं राज्यसभा सीट भी जीत लेगी और अगर विपक्ष गठबंधन इंडिया ब्लॉक समर्थन हासिल करने में सफल रहती है तो जीत आसान हो सकती है.

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