
PM मोदी के दौरे से पहले नेतन्याहू ने लॉन्च किया Hexagon Alliance, भारत को बनाया पार्टनर
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इजरायल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए नेतन्याहू के बयान के मुताबिक, इस गठबंधन में कई अरबी, अफ्रीकी और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से इजरायल के दो दिनों के दौरे पर रवाना होंगे. उनका यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रहा है. लेकिन पीएम मोदी के इस दौरे से पहले इजरायल में एक नया गठबंधन बनता नजर आ रहा है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हेक्सागन गठबंधन का प्रस्ताव रखा है. उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने के लिए हेक्सागन गठबंधन जरूरी है.
नेतन्याहू ने इस गठबंधन में कोर पार्टनर के तौर पर भारत के अलावा इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को प्रमुख साझेदार बताया है. इजरायल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए नेतन्याहू के बयान के मुताबिक, इस गठबंधन में कई अरबी, अफ्रीकी और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं. यह ऐलान ऐसे समय में हुई है, जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. वहीं, पाकिस्तान और सऊदी अरब नाटो जैसी संधि के लिए हाथ मिला चुके हैं, जिसमें तुर्की के भी शामिल होने की चर्चा है.
नेतन्याहू ने इस पहल को रणनीतिक और भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है. उनके निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 25–26 फरवरी को इजरायल की राजकीय यात्रा पर जाएंगे. भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल की दूसरी यात्रा होगी. मंगलवार को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा के दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी हितों के विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे.
क्या है नेतन्याहू का हेक्सागन गठबंधन?
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने 22 फरवरी को कैबिनेट बैठक में इस अलायंस का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि हम मिडिल ईस्ट के आसपास या उसके भीतर गठबंधनों की एक पूरी व्यवस्था बनाएंगे. इसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय देश (ग्रीस और साइप्रस) और एशिया के कुछ देश शामिल होंगे, जिनका अभी मैं विस्तार से उल्लेख नहीं करूंगा. मैं इसे व्यवस्थित तरीके से पेश करूंगा.
नेतन्याहू ने कहा कि मकसद उन देशों को एक साथ लाना है, जो वास्तविकता, चुनौतियों और लक्ष्यों को लेकर एक समान सोच रखते हों ताकि कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला किया जा सके, फिर चाहे वह कट्टर शिया हो, जिन पर हमने कड़ा हमला किया है या सुन्नी. इन सभी देशों का अलग-अलग दृष्टिकोण है और हमारा सहयोग बड़े परिणाम दे सकता है. इसके साथ ही हमारी स्थिरता और भविष्य को सुरक्षित कर सकता है. यह फ्रेमवर्क सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

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