
Pakistan: पूर्व सेनाध्यक्ष बाजवा को बॉस बुलाने पर इमरान खान ने कह दी ये बात
AajTak
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि उन्होंने कभी पद पर रहते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष बाजवा को बॉस नहीं कहा. खान ने बाजवा पर डबल गेम खेलने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने बाजवा पर उनकी सरकार के साथ डबल गेम खेलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2019 में बाजवा का कार्यकाल बढ़ाकर बहुत बड़ी गलती की थी.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा है कि वह पद पर रहते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा को बॉस बुलाते थे. खान ने साफ किया कि प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान मैंने कभी बाजवा को बॉस नहीं कहा.
इमरान खान (70) ने लाहौर के जमान पार्क में अपने निवास स्थान पर यूट्यूबर्स के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि मैं क्यों उन्हें (बाजवा) बॉस कहूंगा. दरअसल उनसे एक पत्रकार ने यहां इस बारे में सवाल किया था, जिसका जवाब देते हुए उन्होंने यह सफाई दी. उन्होंने कहा कि मैंने कभी पूर्व सेनाध्यक्ष को बॉस नहीं कहा.
हमारी पार्टी को अथाह सपोर्ट
इमरान खान ने कहा कि बीते सात महीनों में क्या हुआ? क्या हमारी पार्टी टूटी? आज हमारी पार्टी के पास इतना समर्थन है, जितना इतिहास में किसी भी पार्टी के पास नहीं रहा. यहां तक कि भुट्टो के पास भी उतना समर्थन नहीं था, जितना हमारी पार्टी के पास है.
खान ने बाजवा पर डबल गेम खेलने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने बाजवा पर उनकी सरकार के साथ डबल गेम खेलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2019 में बाजवा का कार्यकाल बढ़ाकर बहुत बड़ी गलती की थी.
बता दें कि बाजवा (61) का सेनाध्यक्ष कार्यकाल तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तीन साल के लिए बढ़ा दिया था. बाजवा बीते महीने 29 नवंबर को ही पद से रिटायर हुए हैं.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









