
Pakistan: इमरान हटे लेकिन सियासी ड्रामा खत्म नहीं... अब सीनेट के स्पीकर और राष्ट्रपति की कुर्सी पर विपक्ष की नजर!
AajTak
पाकिस्तान का सियासी ड्रामा अभी और लंबा खींच सकता है. बिलावल भुट्टो की पार्टी के नेताओं का कहना है कि विपक्ष अब सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी को हटाने की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को भी महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है.
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान का सियासी संकट फिलहाल खत्म हो गया है. इमरान खान जा चुके हैं और शहबाज शरीफ आ चुके हैं. महीनों से जारी सियासी ड्रामे के बाद सोमवार को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के अध्यक्ष और पूर्व पीएम नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री चुन लिया गया. भले ही पाकिस्तान का सियासी संकट अब खत्म हो गया है, लेकिन सियासी ड्रामा अभी खत्म नहीं हुआ है. इमरान खान की कुर्सी के बाद अब विपक्ष की नजर सीनेट के स्पीकर और राष्ट्रपति की कुर्सी पर है.
पाकिस्तानी मीडिया 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अब जल्द ही पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के स्पीकर की कुर्सी भी बहुत जल्द खाली हो सकती है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के एक सीनियर नेता ने 'डॉन' को बताया है कि विपक्ष अब सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी को हटाने की तैयारी कर रहा है. ये पद खाली होने के बाद PPP के खाते में आ सकता है.
PPP के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी हैं. बिलावल भुट्टो की पार्टी ने शहबाज शरीफ को समर्थन दिया है. PPP के कुछ नेताओं का मानना है कि बिलावल भुट्टो को शहबाज शरीफ की सरकार में कोई कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बजाय किसी संवैधानिक पद को संभालना चाहिए.
अगस्त 2019 में भी सादिक संजरानी को हटाने के लिए विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था. उस समय ये अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था. सीनेट में 104 सीटें हैं. अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए 64 वोटों की जरूरत थी, लेकिन विपक्ष 50 वोट ही हासिल कर सका था.
ये भी पढ़ें-- शहबाज शरीफ का भारत को लेकर कैसा रहा है नजरिया, चीन क्यों मानता है इमरान से बेहतर दोस्त?
राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की कुर्सी पर भी खतरा!

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








