
Pakistan: इमरान खान के निशाने पर फिर आए बाजवा, कहा- दुश्मन से ज्यादा देश को नुकसान पहुंचाया
AajTak
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान ने एक बार फिर पूर्व सेनाध्यक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह दुश्मन से कहीं ज्यादा देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं. पूरी दुनिया जानती है कि परवेज मुशर्रफ के बाद बाजवा ने ही शरीफ और जरदारी परिवारों के अपराधों को लेकर उन्हें माफी दे दी थी.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर देश के पूर्व सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा पर निशाना साधा है. उन्होंने बाजवा पर आरोप लगाया है कि वह दुश्मन से अधिक देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान ने लाहौर स्थित अपने आवास पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि बाजवा ने उनकी पार्टी के सदस्यों को भी परेशान किया. खान ने कहा कि बाजवा ने पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के सदस्यों विशेष रूप से शरीफ परिवार से जुड़े लोगों की जमकर तरफदारी की है.
शरीफ और जरदारी परिवारों को दिया एनआरओ
उन्होंने कहा, जनरल बाजवा ने पाकिस्तान के साथ जो किया है, वह दुश्मन भी नहीं कर सकता. जब मैं सत्ता में था, जनरल बाजवा मुझसे कहते थे कि चोरों (शरीफ और जरदारी परिवार) की जवाबदेही के बारे में भूल जाओ. पूरी दुनिया जानती है कि जनरल परवेज मुशर्रफ और फिर बाजवा ने पहला एनआरओ (अपराधों के लिए माफी) डील पीपीपी और पीएमएल-एन पार्टी के साथ की थी. एनआरओ यानी नेशनल रिकंसिलिएशन ऑर्डिनेंस 2007 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ लेकर आए थे, जिसके तहत पीपीपी के कई नेताओं को उनके अपराधों के लिए माफी दी गई थी. पीपीपी से जुड़े कई लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे.
इससे पहले खान (70) बाजवा पर उनकी सरकार के खिलाफ डबल गेम खेलने का भी आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 2019 में बाजवा का कार्यकाल बढ़ाकर उन्होंने बहुत बड़ी गलती की थी.
उन्होंने कहा था कि जनरल बाजवा मुझसे जो भी कहते थे, मैं आंख मूंदकर उस पर यकीन कर लेता था क्योंकि हमारे हित एक जैसे ही थे. हमारा मकसद देश को बचाना था.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








