
PAK में राजनीतिक अस्थिरता का भारत पर क्या होगा असर? 2 पूर्व विदेश मंत्रियों ने बताया
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Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में जारी सियासी उठापटक पर भारत भी निगाहें बनाए हुए है. इसका असर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में आज तक ने इस मसले पर भारत के 2 पूर्व विदेश मंत्रियों नटवर सिंह और यशवंत सिन्हा से खास बातचीत की है.
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता कायम है. रविवार को नेशनल असेंबली में इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होगी. उधर, पाकिस्तान में मचे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के दो पूर्व विदेश मंत्रियों ने भारत पर इसके असर को लेकर अपनी राय जाहिर की है.
पाकिस्तान में राजनीति अस्थिरता पर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान में जो कुछ हुआ है वो बहुत अजीब बात नहीं है. पाकिस्तान स्थिर मुल्क नहीं है. विपक्ष के पास 199 और इमरान के पास 142 सासंद हैं. विपक्ष के लोग सुप्रीम कोर्ट गए हैं, देखिए क्या होता है. पाकिस्तान में डेमोक्रेसी ने अपनी जड़ें मजबूत नहीं की है.
वहीं, पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि एक बार फिर पाकिस्तान में प्रजातंत्र का माखौल उड़ा है. इमरान जिस तरह से अविश्वास प्रस्ताव से भाग गए, ये शर्मनाक है. प्रजातंत्र की ताकत संस्थाएं होती हैं. संस्थाओं में कोई ताकत नहीं है. डिप्टी स्पीकर का व्यवहार भी शर्मनाक है. पाकिस्तान में भारी अस्थिरता होगी. लोग सड़कों पर भी उतर सकते हैं. हमारे पड़ोस में इस तरह की घटनाएं होती हैं तो ये ठीक संकेत नहीं है. पाकिस्तान आंतरिक मामलों से निपटने के लिए कुछ भी कर सकता है जिस तरह से वो अमेरिका को दोष दे रहे हैं.
सेना को लेकर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि ये जो कुछ हो रहा है, वो आंतरिक मामला है, अगर वो कुछ छेड़छाड़ करेंगे तो फिर बालाकोट जैसा जवाब दे दिया जाएगा. जो वहां हो रहा है वो प्रजातंत्र के लिए अच्छा नहीं है. जहां तक फौज का सवाल है, इमरान पीएम भले हों, आर्मी ने कह दिया है कि वो दखल नहीं देगी लेकिन जिस दिन फौज ने फैसला कर लिया इमरान को घर जाना होगा.
यशवंत सिन्हा ने कहा कि फौज की भूमिका वही रहेगी जो हमेशा से रही है. पाक में जो भी हुकूमत रही है वो फौज के आशीर्वाद से ही बनी है. फौज का दखल वहां की राजनीति में बरकरार रहेगा, आने वाले समय में ये और मजबूत भी हो सकता है. पाकिस्तान में अगर लोग सड़कों परउतरेंगे तो फौज के लिए ये काम और आसान हो जाएगा. पाकिस्तान की फौज कंट्रोल अपनी हाथों में ले लेगी.
यशवंत सिन्हा ने कहा कि पड़ोसी देश होने के नाते हमें फौज की भूमिका पर नजरें रखनी होगी. वहीं, नटवर सिंह ने कहा कि 30-35 साल से पाकिस्तान में तनाशाह शासन रहा है. किसी भी सरकार ने 5 साल पूरे नहीं किए हैं.

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