
दिल्ली सरकार का एक साल पूरा होने पर AAP ने लगाए पोस्टर, पार्टी का आरोप- BJP हटवा रही
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दिल्ली में बीजेपी सरकार के एक साल पूरे होने पर आम आदमी पार्टी ने राजधानी की बिगड़ती स्थिति को लेकर कड़ी आलोचना की है. दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, पानी की किल्लत और स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट को लेकर चिंता जताई.
दिल्ली में बीजेपी की सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर आम आदमी पार्टी ने सरकार के कामकाज की आलोचना की. दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, 'राजधानी की राजनीति में एक साल के भीतर तस्वीर कैसी हुई है, यह अब सड़कों और गलियों में साफ नजर आने लगा है.'
सेंट्रल दिल्ली में जाम ही जाम उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस एक घंटे देर से शुरू हुई और इसके लिए दिल्ली व केंद्र सरकार का 'धन्यवाद' देना चाहिए, क्योंकि सेंट्रल दिल्ली में पिछले तीन दिनों से ऐसा ट्रैफिक जाम है कि टैक्सी ड्राइवर उस इलाके में आने से कतरा रहे हैं. राजधानी के कई इलाकों में ट्रैफिक, प्रदूषण, पानी की किल्लत और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों की शिकायतें बढ़ी हैं.
उन्होंने कहा '2025 से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी को लेकर जिस “दिल्ली मॉडल” की चर्चा होती थी, उसे अब फिर से याद किया जा रहा है. पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में शुरू हुए मोहल्ला क्लीनिक गरीब और मध्यम वर्ग के लिए राहत का जरिया बने थे. सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और परीक्षा परिणामों को लेकर देश-विदेश में चर्चा होती थी. बिजली बिलों में राहत और पानी की बेहतर आपूर्ति ने आम लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित किया था.'
दिल्ली सरकार का किया विरोध इस दौरान आम आदमी पार्टी ने राजधानी में पोस्टर्स लगाकर मौजूदा सरकार के खिलाफ विरोध जताया. पोस्टर्स पर लिखा था. 'एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल'. कहा गया कि 'राजधानी के कई हिस्सों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ मोहल्ला क्लीनिक सुस्त पड़े हैं या सेवाएं पहले जैसी सक्रिय नहीं दिख रहीं. सरकारी अस्पतालों में भीड़ और लंबी कतारें बढ़ने की बातें सामने आ रही हैं. ट्रैफिक जाम अब आम अनुभव बन चुका है, जबकि प्रदूषण का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है.'
मौजूदा सरकार पर उठाए सवाल आम आदमी पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, 'एक साल के शासन का मतलब सिर्फ सत्ता में बने रहना नहीं होता, बल्कि यह साबित करना होता है कि जनता का जीवन बेहतर हुआ. अगर राजधानी की तस्वीर में सुधार के बजाय अव्यवस्था दिखे, तो सवाल उठेंगे ही, और जब सवाल उठते हैं, तो तुलना भी होती है, उस दौर से, जब लोगों को लगता था कि सरकार उनके लिए काम कर रही है.
दिल्ली आज उसी तुलना के दौर से गुजर रही है. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, 'जनता के मन में उठ रहा सवाल साफ है. क्या राजधानी फिर से उस मॉडल की तरफ लौटेगी, जिसे कभी “दिल्ली मॉडल” कहा गया था, या मौजूदा हालात ही उसकी नई पहचान बनेंगे?'

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