
Osamu Suzuki: भारत में एंट्री कर आम आदमी तक पहुंचाई ड्रीम कार! जानें कौन थे मरणोपरांत पद्म विभूषण पाने वाले ओसामु सुजुकी
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Padma Vibhushan Osamu Suzuki: ओसामु सुजुकी ने एक बार एक टेलीविजन चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था,
Who Was Osamu Suzuki: सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पूर्व चेयरमैन ओसामु सुजुकी को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) से सम्मानित किया गया है. उन्हें देश के ऑटोमोटिव उद्योग में उनके योगदान के लिए ये महत्वपूर्ण सम्मान दिया जा रहा है. बता दें कि पिछले महीने 94 वर्ष की आयु में ओसामु सुजुकी का निधन हो गया था. इससे पहले साल 2007 में भारतीय अर्थव्यवस्था को आकार देने में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें पद्म भूषण (Padma Bhushan) से सम्मानित किया गया था. तो आइये जानते हैं कि, आखिर ओसामु सुजुकी कौन थें और भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उनकी क्या भूमिका थी.
कौन थें ओसामु सुजकी:
ओसामु मात्सुदा का जन्म 30 जनवरी, 1930 को जापान के गेरो में हुआ था. साल 1958 में सुजुकी फैमिली में विवाह करने के बाद वो इस कारोबारी घराने से जुड़े. उन्होनें अपने सरनेम में अपनी पत्नी के परिवार का नाम जोड़ा और यहीं से सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन की एक परिवर्तनकारी यात्रा भी शुरू हुई. विवाह के समय ओसामु एक बैंक कर्मचारी थें और उन्होंने शोको सुजुकी (Shoco Suzuki) से शादी की थी. शोको, 1909 में स्थापित करघा निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर के संस्थापक मिचियो सुजुकी की पोती थीं.
तकरीबन 40 वर्षों तक ओसामु ने कंपनी का नेतृत्व किया. इस दौरान वो दो बार बतौर प्रेसिडेंट रहे. उनके मार्गदर्शन में, सुजुकी मोटर ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप में अपना नेटवर्क विस्तार करने के लिए जनरल मोटर्स और फॉक्सवैगन के साथ रणनीतिक साझेदारी की. आज सुजुकी ऑटोमोबाइल की दुनिया की एक बड़ा नाम बन चुकी है. छोटी कारों से लेकर एसयूवी और यहां तक टू-व्हीलर इंडस्ट्री में भी कंपनी मजबूती से पैठ बनाए हुए है.
भारत में प्रवेश:
सुजुकी अपनी स्पष्ट टिप्पणियों और ख़ास फ्रेंडली नेचर के लिए जाने जाते थे, वे खुद को "एक छोटी से मिड-साइज की कंपनी का पुराना आदमी" कहते थें. वे 1978 में सुजुकी के सीईओ बने और उस समय कंपनी का नेतृत्व कर रहे थें जब कंपनी भारत में लोकल प्रोडक्शन शुरू करने वाली पहली जापानी वाहन निर्माता कंपनी बनी.

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