
Nothing Phone 3 Launch: क्यों लोगों को पसंद नहीं आ रहा ये फोन? कंपनी से कहां हुई गलती
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Nothing Phone 3 Price in India: नथिंग ने ग्लोबल और भारतीय मार्केट में अपना नया फोन Nothing Phone 3 लॉन्च कर दिया है. ये स्मार्टफोन ब्रांड का पहला फ्लैगशिप फोन है, जो अब तक का ब्रांड का सबसे ज्यादा कीमत पर आने वाला डिवाइस है. इसमें आपको 5500mAh की बैटरी दी गई है. हालांकि, जिस कीमत पर ये फोन लॉन्च हुआ है, बहुत से लोगों को ये पसंद नहीं आ रहा है.
Nothing ने अपना नया हैंडसेट 'Phone 3' लॉन्च कर दिया है. ब्रांड इस फोन को फ्लैगशिप बता रहा है और कीमत भी एक फ्लैगशिप वाली है, लेकिन फीचर्स के मामले में ये फोन फ्लगैशिप नहीं लगता है. कम से कम ऑन पेपर तो इसका हाल ऐसा ही है. कंपनी ने दूसरे डिवाइसेस की तरह ही इस फोन का भी काफी बज्ज बना था, लेकिन हकीकत अलग है.
मार्केट में जब Nothing की एंट्री हुई थी, तो लगता था कि फ्लैगशिप सेगमेंट में Samsung और Apple को टक्कर मिलेगी. हालांकि, ऐसा कुछ हुआ नहीं. इसके बाद लगा कि चलो OnePlus को ही ब्रांड टक्कर देगा, लेकिन इसकी भी उम्मीद कम है. वैसे वनप्लस से Nothing का रिश्ता तो पता है ना.
Nothing के CEO Carl Pie, वनप्लस के को-फाउंडर थे. उन्होंने वनप्लस छोड़कर जब Nothing को शुरू किया था, तब भी ऐसा लग रहा था कि वो कुछ कमाल करेंगे, लेकिन अब तक कंपनी कुछ खास नहीं कर पाएगी. खास के नाम पर 'अटपटा' डिजाइन है, जो आम यूजर्स को तो पसंद नहीं आता है.
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बात करें Nothing Phone 3 की, तो कंपनी ने इसे 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. ये कीमत फोन के 12GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट की है. इस कीमत में आपको iPhone 16 और Samsung Galaxy S25 मिल जाते हैं. वैसे ये दोनों फिलहाल इससे भी कम कीमत पर मिल जाएंगे. दोनों ही फोन्स के मुकाबले Nothing Phone 3 कमजोर ब्रांड वैल्यू के साथ आता है.
कंपनी ने Glyph इंटरफेस को भी Glyph Matrix से रिप्लेस कर दिया है. कंपनी इस फीचर को ऐसे टीज कर रही है, जैसे बहुत कुछ बड़ा अचीव कर लिया हो, लेकिन Lava के बजट फोन्स में भी आपको सेकेंडरी डिस्प्ले मिल जाती है. ये डिस्प्ले कई काम में इस्तेमाल की जा सकती है. वहीं डॉट मैट्रिक्स रियर पैनल पर ROG पिछले कई साल के ऑफर करता है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












