
Navratri 2022: नवरात्रि के सातवें दिन आज मां कालरात्रि की पूजा, जानें उपाय और पूजन विधि
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kalratri pujan vidhi: मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं, जो काफी भयंकर है. इनका रंग काला है और ये तीन नेत्रधारी हैं. मां कालरात्रि के गले में विद्युत की अद्भुत माला है. इनके हाथों में खड्ग और कांटा है. गधा देवी का वाहन है. ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं.
Navratri 2022 seventh day puja significance: मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं, जो काफी भयंकर है. इनका रंग काला है और ये तीन नेत्रधारी हैं. मां कालरात्रि के गले में विद्युत की अद्भुत माला है. इनके हाथों में खड्ग और कांटा है. गधा देवी का वाहन है. ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं. इस बार शारदीय नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा 02 अक्टूबर को की जाएगी.
कब है सप्तमी तिथि? आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शनिवार, 01 अक्टूबर को रात 08 बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होगी और रविवार, 02 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन के सारे दुख, सारे संकट खत्म हो सकते हैं.
मां कालरात्रि की पूजा विधि? (Maa kalratri pujan vidhi) नवरात्रि के सातवें दिन मां के समक्ष घी का दीपक जलाएं. देवी को लाल फूल अर्पित करें. साथ ही गुड़ का भोग लगाएं. देवी मां के मंत्रों का जाप करें या सप्तशती का पाठ करें. फिर लगाए गए गुड़ का आधा भाग परिवार में बाटें. बाकी आधा गुड़ किसी ब्राह्मण को दान कर दें. इस दिन काले रंग के वस्त्र धारण करके तंत्र-मंत्र की विद्या से किसी को नुकसान ना पहुंचाएं.
मां कालरात्रि की पूजा से लाभ शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करनेके लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है. इनकी उपासना से भय,दुर्घटना तथा रोगों का नाश होता है. इनकी उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का (तंत्र-मंत्र) असर नहीं होता है. ज्योतिष में शनि नामक ग्रह को नियंत्रित करने के लिए इनकी पूजा करना अद्भुत परिणाम देता है. जिन लोगों की कुंडली में शनि से जुड़ी समस्या है, उनके लिए भी कालरात्रि की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है.
शत्रुओं को शांत करने का उपाय (Maa kalratri upay) श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके रात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करें. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उन्हें गुड का भोग लगाएं. इसके बाद 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक एक लौंग चढ़ाते जाएं. नवार्ण मंत्र है - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे." उन 108 लौंग को इकठ्ठा करके अग्नि में डाल दें. आपके विरोधी और शत्रु शांत होंगे.

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