
March Grah Gochar 2026: मार्च में बैक-टू-बैक ग्रहों का गोचर! इन राशियों को मिलेगा करियर और धन लाभ
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March Grah Gochar 2026: मार्च 2026 की शुरुआत में 2 से 5 मार्च के बीच शुक्र, मंगल और सूर्य सहित कई ग्रहों का गोचर होने जा रहा है. इस बैक-टू-बैक ग्रह परिवर्तन से खास योग बन रहा है, जिसका असर 6 राशियों पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है. जानें किन राशियों को मिलेगा धन, करियर और किस्मत का साथ.
March Grah Gochar 2026: मार्च का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है. ज्योतिष के अनुसार, मार्च की शुरुआत बेहद खास रहने वाली है, क्योंकि 2 से 5 मार्च के बीच कई बड़े ग्रह राशि और नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं. इस दौरान ग्रहों का बैक-टू-बैक गोचर एक शक्तिशाली संयोग बना रहा है, जिसका असर कई राशियों पर देखने को मिलेगा. 2 मार्च को शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 3 मार्च को प्लूटो श्रवण नक्षत्र में गोचर करेगा और इसी दिन मंगल शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. फिर 4 मार्च को शुक्र उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जाएंगे और 5 मार्च को सूर्य पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इन लगातार हो रहे बदलावों से 6 राशियों के लिए शुभ समय की शुरुआत हो सकती है. आइए ज्योतिषाचार्य नितिशा मल्होत्रा से जानते हैं किन राशियों को मिलेगा इसका लाभ.
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए यह समय अचानक लाभ देने वाला साबित हो सकता है. रुका हुआ धन वापस मिलने के योग बन रहे हैं और लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं. करियर में आ रही बाधाएं दूर होंगी और नई उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और व्यापार में भी तेजी आएगी. परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी.
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और बंदरों व कुत्तों को मीठी रोटी खिलाएं.
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए यह समय करियर में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है. नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. आपकी मेहनत की सराहना होगी और अवॉर्ड या रिवॉर्ड मिलने के योग बन रहे हैं. नए संपर्क बनेंगे, जो आगे चलकर आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












