
Maha Kumbh 2025: AI कैमरे और ड्रोन्स से लैस है सिक्योरिटी सिस्टम, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर
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Maha Kumbh Mela 2025: 13 जनवरी से महाकुंभ 2025 की शुरुआत हो रही है. 45 दिनों तक चलने वाले कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. ऐसे में टेक्नोलॉजी भी एक बड़ी भूमिका अदा कर रही है. लोगों की सुरक्षा से लेकर सुविधा तक के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. आइए जानते हैं कुंभ मेले में किस तरह से टेक्नोलॉजी लोगों की मदद कर रही है.
महाकुंभ मेला 2025 की शुरुआत 13 जनवरी से हो रही है. प्रयागराज में हो रहे महाकुभ में हमें भक्ति के साथ टेक्नोलॉजी का संगम देखने को मिलेगा. इस मेले में करोड़ों लोग हिस्सा लेंगे, जिनकी सुरक्षा से लेकर सुविधा तक के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. बात चाहे भीड़ को मैनेज करने की हो या फिर लोगों की सुरक्षा की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आपको हर जगह देखने को मिलेगा.
कुंभ मेला में AI का इस्तेमाल कई तरीके से किया जा रहा है. बड़ी संख्या में आने वाली भीड़ को मैनेज करने के लिए AI इनेबल कैमरा, RFID रिस्टबैंड, ड्रोन सर्विलांस और मोबाइल ऐप ट्रैंकिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. 45 दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में आपको जगह-जगह पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दिखेगा.
इस महा मेला में हिस्सा लेने वाले श्रद्धालु वर्चुल रियलिटी स्टॉल के जरिए गंगा आरती और दूसरे कार्यक्रमों को देख सकेंगे. रात में 2000 ड्रोन्स की मदद से एक ड्रोन शो भी किया जाएगा, जिसमें प्रयागराज के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने Kumbh Sah'Ai'yak लॉन्च किया है, जो AI पावर्ड चैटबॉट है.
कुंभ के दौरान अंडर वॉटर ड्रोन्स भी यूज किए जाएंगे. ऐसे ड्रोन्स पानी के अंदर भी जा कर निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. नॉर्मल ड्रोन्स सिर्फ हवा में उड़ते हैं, जबकि अंडर वॉटर ड्रोन्स को स्पेशली पानी के अंदर सर्विलैंस के लिए तैयार किया जाता है. देखने में ये नॉर्मल ड्रोन की तरह ही लगते हैं.
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इस चैटबॉट को आप 11 भाषाओं में इस्तेमाल कर सकेंगे. ये चैटबॉट महाकुंभ मेला 2025 में आने वालों को सभी जरूरी जानकारियां देगा. आप इसे वॉट्सऐप पर एक्टिवेट कर सकते हैं. इसके लिए आपको 8887847135 पर नमस्ते लिखना होगा. या फिर आप https://chatbot.kumbh.up.gov.in के जरिए इस चैटबॉट को एक्सेस कर सकते हैं.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












