
Life in Space: कैसे खाते-नहाते हैं, कहां होता है बाथरूम? Astronauts ने VIDEO में दिखाया
AajTak
एस्ट्रोनॉट्स खाना कैसे खाते हैं, पानी कैसे पीते हैं, कैसे नहाते हैं और बाथरूम कैसे जाते हैं. लोगों की इसी जिज्ञासा को देखते हुए कई एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष से ही वीडियो शेयर करते हैं. इनमें वो बताते हैं कि अंतरिक्ष में कैसे जरूरी काम किए जाते हैं.
अंतरराष्ट्रपति अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इस दौरान उन्हें बहुत से नए अनुभव भी मिल जाते हैं. धरती पर रहने वाले लोगों को इस बारे में जानना हमेशा से ही दिलचस्प लगा है. लोग सोचते हैं कि भला एस्ट्रोनॉट्स खाना कैसे खाते हैं, पानी कैसे पीते हैं, कैसे नहाते हैं और बाथरूम कैसे जाते हैं. लोगों की इसी जिज्ञासा को देखते हुए कई एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष से ही वीडियो शेयर करते हैं. इनमें वो बताते हैं कि अंतरिक्ष में कैसे जरूरी काम किए जाते हैं. तो चलिए अब इनके वीडियो देख सकते हैं-
1. अंतरिक्ष में एक्सरसाइज करना
एस्ट्रोनॉट सामंथा क्रिस्टोफोरेटी ने कुछ साल पहले एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें दिखाया गया कि कैसे एस्ट्रोनॉट्स 'वजन' उठाते हैं. उन्होंने कहा, 'अंतरिक्ष और पृथ्वी पर वेटलिफ्ट करने वाली एक्सरसाइज हमें हड्डियों के घनत्व और मजबूत मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करती हैं. इसे उठाना होता है, पुश करना होता है. और फिर हड्डियां मजबूत होती हैं.' वीडियो में उन्हें आईएसएस और पृथ्वी पर एक्सरसाइज करते हुए दिखाया गया है.
2. अंतरिक्ष में शैंपू करना
नासा ने यूट्यूब पर इस एस्ट्रोनॉट का बाल धोते हुए एक वीडियो शेयर किया. उसने पोस्ट में लिखा, 'अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने से जुड़ी कई चुनौतियां हैं. जो चीजें पृथ्वी पर करना आसान है, जहां ग्रैविटी है, वही अंतरिक्ष में मुश्किल हो सकती हैं. जो एस्ट्रोनॉट एक दशक से अधिक समय से अंतरिक्ष स्टेशन पर रह रहे हैं, उन्होंने कुछ तरीके इजात किए हैं, जो इन रोजमर्रा के कामों को आसान बनाते हैं. एक्सपीडिशन 36 फ्लाइट इंजीनियर करेन न्यबर्ग ने दिखाया कि वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर माइक्रोग्रैविटी में अपने बाल कैसे धोती और सुखाती हैं.'
3. अंतरिक्ष में सोना

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












