
KGF का 'रॉकी भाई' बनना चाहता था ये सीरियल किलर, चौकीदारों के बाद पुलिसवाले थे निशाने पर
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मध्य प्रदेश के सागर जिले में दहशत बन चुका चौकीदारों का सीरियल किलर अब कानून के शिकंजे में है. आजतक ने बीते गुरुवार को ही इस सीरियल किलर की पूरी कहानी तफ्सील से टीवी पर दिखाई थी. इस ख़बर के प्रसारण के ठीक 24 घंटे के अंदर-अंदर ये सीरियल किलर पकड़ा गया.
इसी साल अप्रैल में एक फिल्म आई थी केजीएफ-2. इस फिल्म में हीरो का नाम था रॉकी भाई. सागर जिले के रहने वाले एक नौजवान को रॉकी भाई इतना पसंद आया कि उसने खुद भी रॉकी भाई जैसा डॉन बनने की ठान ली. इसके बाद उसने महज कुछ दिनों में ही 4 कत्ल कर डाले. खास बात ये थी कि मरने वाले सभी सुरक्षा गार्ड थे. इसके आगे वो पुलिसवालों का अपना शिकार बनाना चाहता था. मगर शुक्र है कि इससे पहले वो सीरियल किलर पुलिस के हत्थे चढ़ गया. पढ़ें इस सीरियल किलर की पूरी दास्तान..
सीसीटीवी में दर्ज है कत्ल की वारदात जो सीवीटीवी फुटेज सागर पुलिस के हाथ लगी है. उसकी एक तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कैसे वो सीरियल किलर एक फैक्ट्री में सो रहे चौकीदार पर हमला करता है और उसे बेरहमी से मौत की नींद सुला देता है. ऐसे ही उसने कम से कम चार क़त्ल अंजाम दिए. हालांकि उसने ज्यादा से ज्यादा कितने कत्ल किए फिलहाल ये खुद पुलिस भी नहीं जानती. पूछताछ के दौरान उस कातिल ने एक-एक कर चार लोगों के कत्ल की बात फिलहाल कबूल कर ली है. एक और दो मई की रात को भोपाल में सीरियल किलर के हाथों हुआ कत्ल शायद आखिरी कत्ल था. क्योंकि इसके बाद वो कातिल पकड़ा गया.
आजतक की ख़बर का असर इसी के साथ पिछले चार दिनों से मध्य प्रदेश के पूरे सागर जिले में दहशत बन चुका चौकीदारों का या यूं कहें कि नींद का सीरियल किलर अब कानून के शिकंजे में है. आजतक ने बीते गुरुवार को ही इस सीरियल किलर की पूरी कहानी तफ्सील से टीवी पर दिखाई थी. इस ख़बर के प्रसारण के ठीक 24 घंटे के अंदर-अंदर ये सीरियल किलर पकड़ा गया.
19 साल का शिव प्रसाद धुर्वे निकला सीरियल किलर 9 साल के देश के इस सबसे नए-नए और ताजा ताजा सीरियल किलर का नाम शिव प्रसाद धुर्वे है. वो एमपी के सागर जिले का ही रहनेवाला है. धुर्वे आठवीं पास है, वो पहले पुणे और गोवा में भी छोटी-मोटी नौकरी कर चुका है. ठीक-ठाक अंग्रेजी बोल लेता है. अभी बरसात शुरू होने से पहले ही वो वापस सागर आया था. सागर आने तक भी सबकुछ ठीक था. मगर फिर तभी इसी साल अपैल में फिल्म केजीएफ-2 रिलीज हुई. बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई इस फिल्म को शिव प्रसाद ने भी देखी और बस यहीं से उसकी पूरी सोच ही बदल गई. केजीएफ टू के रॉकी भाई से वो इतना प्रभावित हुआ कि उसने भी रॉकी भाई जैसा ही डॉन बनने की ठान ली. डॉन बनने के बाद वो अपना गैंग बनाना चाहता था. रॉकी भाई जैसा ही. मगर उसके लिए उसे पैसे चाहिेए थे और पैसे से भी पहले नाम. ठीक रॉकी भाई जैसा ही.
ड्यूटी पर सोने वाले गार्ड का कत्ल इसी के बाद उसने पहले नाम कमाने और खुद को मशहूर करने का फैसला किया. जुर्म की दुनिया में अपनी एक अलग जगह बनाने के लिए उसने कई तरीकों पर गौर किया. फिर फैसला किया कि वो ऐसा काम करेगा जिससे ना सिर्फ लोग उससे डरेंगे बल्कि पुलिस भी परेशान हो उठेगी. इसी के बाद उसने तय किया कि वो उन चौकीदारों या सिक्योरिटी गार्ड को मारेगा, जो ड्यूटी पर सो रहे होते हैं. दरअसल, एक बार एक चौकीदार से बातचीत करते हुए उसने कहा था कि उसे वो गार्ड बिलकुल पसंद नहीं है, जो अपनी ड्यूटी के वक्त सो रहे होते हैं. फैसला हो चुका था. अब उस पर अमल की बारी थी.
अलग-अलग इलाकों में 3 कत्ल 27, 29 और 30 अगस्त की रात शिव प्रसाद ने सागर जिले के अलग-अलग इलाकों में तीन चौकीदारों की हत्या कर दी. तीनों के सर पर डंडे पत्थर या किसी वजनी चीज से वार करके. आखिरी कत्ल के बाद चूंकि सागर पुलिस हरकत में आ चुकी थी, लिहाजा 31 अगस्त की सुबह शिव प्रसाद सागर से भोपाल चला गया। पुलिस को चकमा देने के लिए. मगर उसने एक गलती की. 29 अगस्त को जिस चौकीदार शंभू शरण की उसने हत्या की थी, उस शंभू का मोबाइल वो अपने साथ ले गया था. हालांकि मोबाइल का सिम निकाल कर वो फेंक चुका था. उसे अंदाजा ही नहीं था कि उस मोबाइल में कोई भी सिम डाल कर उसे चालू करने पर उसका लोकेशन पता चल सकता है. भोपाल पहुंचने के बाद उसने शंभू के मोबाइल में नई सिम डाली. शाम को उसने जैसे ही फोन ऑन किया, सागर पुलिस को शंभू के मोबाइल का लोकेशन पता चल गया.

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