
Indian Mobile Congress: PM मोदी ने किया 100 5G लैब्स का उद्घाटन, 6G-AI से लेकर साइबर सिक्योरिटी तक पर चर्चा
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Indian Mobile Congress 2023: भारत मंडपम में इंडियन मोबाइल कांग्रेस की शुरुआत हो चुकी है. 27 अक्टूबर से शुरू हुआ ये इवेंट 29 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें कई बड़े ऐलान होंगे. इस इवेंट में भारतीय टेलीकम्युनिकेशन से जुड़े कई बड़े ऐलान हुए हैं. इवेंट की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है. इसमें 6G टेस्ट बेड्स से लेकर 5G लैब्स तक कई प्रमुख शुरुआत हुई.
Indian Mobile Congress 2023 की शुरुआत हो चुकी है. इस इवेंट के साथ ही देश में 6G टेस्टबेड की लॉन्चिंग को भी हरी झंडी दिखा दी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस इवेंट में 100 5G लैब्स का ऐलान किया है, जिसमें 5G से जुड़ी तमाम टेक्नोलॉजी को टेस्ट किया जाएगा.
इससे नए स्टार्टअप की शुरुआत हो सकेगी. 5G के रोलआउट में भले ही भारत दूसरे देशों से पिछड़ गया हो, लेकिन 6G को लेकर सरकार पीछे नहीं रहना चाहती है. यही वजह है कि सरकार अभी से 6G की तैयारी में लग गई है.
प्रधानमंत्री ने कई राज्यों में 5G लैब्स का उद्याटन किया है. इस लिस्ट में दिल्ली, पंजाब, राज्यस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड समेत अन्य राज्य शामिल हैं. PM मोदी ने इन लैब्स की शुरुआत करते हुए 6G, AI और साइबर सिक्योरिटी पर भी बात की. उन्होंने कहा कि पिछले वक्त हम यहां पर 5G रोलआउट के लिए इकट्ठा हुए थे.
PM मोदी ने कहा कि 5G रोलआउट से हम रीचआउट तक पहुंच रहे हैं. दुनिया में सबसे तेजी से 5G नेटवर्क रोलआउट किया गया है. मोबाइल इंटरनेट स्पीड भी अब काफी बेहतर हो रही है. उन्होंने बताया कि हम 5G के बाद 6G में वर्ल्ड लीडर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्हेंने 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के साथ ही विपक्ष पर निशाना साधा है.
उन्होंने कहा कि 6G के मामले में भारत दुनिया को लीड करेगा. इंटरनेट स्पीड में सुधार से ईज ऑफ लिविंग में भी सुधार होगा. इससे लोग आसानी से अपने डॉक्टर से जुड़ सकते हैं, छात्र अपने शिक्षक से और किसान अपनी खेती के बारे में पता कर पाता है.
Bharat Net प्रोजेक्ट ने 2 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट जोड़ा है. PM ने बताया कि आज हर दिन टेक्नोलॉजी में तेजी से होते परिवर्तन के कारण हम कहते हैं कि The Future on Here and Now.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












