
India-EU FTA : 18 साल लंबी जर्नी... फाइनली डील डन, सस्ती होंगी ये लग्ज़री कारें, लेकिन छिपा एक रहस्य
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India-EU FTA Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस 'मदर ऑफ ऑल डील्स' का एक बड़ा फायदा ऑटो सेक्टर को मिलेगी. यूरोपीय देशों से आने वाली इंपोर्टेड लग्ज़री कारों पर अब 110 के बजाय केवल 10 प्रतिशत टैक्स लगेगा. लेकिन ऐसा नहीं है कि, यू छूट सभी इंपोर्टेड कारों पर मिलेगा. जानिए क्या है हिडेन ट्रूथ.
India-EU FTA Deal Impact on Cars: दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आज एक नया अध्याय खुल गया है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) की बातचीत अब पूरी हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है. यह डील न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत को दिखाती है, बल्कि कारोबार, निवेश और रोज़गार के नए रास्ते भी खोलती है. इस डील का एक बड़ा असर देश के ऑटो सेक्टर पर भी पड़ेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस समझौते का ऐलान किया. इस करार के तहत भारत के 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रोडक्ट पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर्स के खत्म होने की उम्मीद है. इससे कपड़ा, लेदर, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और ज्वेलरी जैसे लेबर बेस्ड सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. ये ऐसे सेक्टर हैं जहां यूरोपीय कंपनियों से सीधी प्रतिस्पर्धा नहीं होती, इसलिए इंडियन एक्सपोटर्स के लिए यूरोप का बाजार और खुला होगा.
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई इस फ्री ट्रेड डील की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. लेकिन टैरिफ, मार्केट एक्सेस और नियमों को लेकर मतभेद के कारण 2013 में इसे रोक दिया गया. साल 2022 में फिर से नेगोसिएशन शुरू हुआ और अब जाकर यह डील पूरी हो सकी है. तकरीबन 18 सालों तक चली इस लंबी यात्रा ने कई पड़ाव देखे हैं. यह भारत की अब तक की सबसे लंबी व्यापारिक बातचीत में से एक रही है. समझौते में कुल 24 चैप्टर हैं, जिनमें गुड्स, सर्विसेज और इन्वेस्टमेंट से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं. इसके साथ ही इन्वेस्टमेंट सेफ्टी और जियोग्राफिकल इंडिकेशन पर अलग से बातचीत भी हुई है.
'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जाने वाले इस बड़े समझौते का बड़ा असर भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी पड़ेगा. लग्ज़री और इंपोर्टेड कारें भारत में और भी सस्ती होंगी. यूरोपीय यूनियन के अनुसार, यूरोप में बनी गाड़ियों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके लिए 2.5 लाख यूनिट का कोटा तय किया गया है. यानी फिलहाल ये छूट 2.5 लाख कारों पर ही लागू होगा. इससे यूरोपीय कार कंपनियों को भारत के तेजी से बढ़ते कार बाजार में अपनी मौजूदगी बेहतर करने का मौका मिलेगा.
इस समझौते के बाद फॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज बेंज, ऑडी, पोर्श, मासेराती, स्कोडा और वोल्वो जैसी कंपनियों को भारत में बड़ा फायदा मिल सकता है. मर्सिडीज बेंज की AMG G63, AMG S 63 ई परफॉर्मेंस और मेबैक एस क्लास, बीएमडब्ल्यू की एम सीरीज, एक्सएम एसयूवी और जेड4 रोडस्टर, साथ ही ऑडी की Q8 और RS Q8 जैसी गाड़ियां ज्यादा किफायती हो सकती हैं.
यूरोप में बनी पोर्श 911, पैनामेरा, मैकन और केयेन जैसी कारों की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है. इटली से आयात होने वाली लैम्बॉर्गिनी की पूरी रेंज, जिसमें उरुस, रेवुएल्टो और हुराकैन शामिल हैं, सस्ती हो सकती है. इसके अलावा फेरारी, मासेराती और वोल्वो की कारों पर भी इस समझौते का असर दिख सकता है.

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