
Imran Khan की सत्ता पर छाया सियासी संकट, जानिए इसकी ख़ास वजहें
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पाकिस्तान से आजकल जो सिग्नल आ रहे हैं वो इमरान खान के लिए बहुत बुरे साबित हो सकते हैं. सवाल ये है कि क्या इमरान खान की कुर्सी अब चंद दिनों की मेहमान है? ISI चीफ की नियुक्ति पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा और इमरान खान के बीच जो टकराव हुआ है, क्या उसकी वजह से इमरान की कुर्सी खतरे में आ गई है? पाकिस्तानी मीडिया में ऐसे सवाल ट्रेंड कर रहे हैं. हालत ये है कि पाकिस्तान की संसद से लेकर सड़क तक सत्ता विरोधी हवाएं बहुत तेज़ी से चल रही हैं, जिसमें इमरान ख़ान की सत्ता कभी भी उड़ सकी है. सबसे पहले आप इमरान ख़ान पर आए इस सियासी संकट की कुछ ख़ास वजहों को समझिये.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









