
Garuda Purana: मृत्यु से पहले ही तय होता है अगला जन्म, जानें गरुड़ पुराण के मुताबिक कैसे होता है पुनर्जन्म
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Garuda Purana: गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है. यह भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ जी के संवाद के रूप में लिखा गया है. इस पुराण में जीवन, मृत्यु, आत्मा, कर्म, पुनर्जन्म और मोक्ष से जुड़े गूढ़ रहस्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है.
Garuda Purana: गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है. इसमें भगवान विष्णु गरुड़ जी को जीवन और मृत्यु से जुड़े गहरे रहस्य समझाते हैं. इस पुराण में बताया गया है कि इंसान की आत्मा मृत्यु के बाद कहां जाती है, कर्मों का क्या असर पड़ता है और अगला जन्म कैसे मिलता है. गरुड़ पुराण के मुताबिक किसी व्यक्ति का अगला जन्म उसकी मौत के बाद तय नहीं होता, बल्कि मरने से पहले ही उसके कर्मों के आधार पर तय हो जाता है. पिछले जन्मों के किए गए कर्म, इस जीवन का भाग्य और आखिरी समय में मन में चल रहे विचार—ये तीनों मिलकर यह तय करते हैं कि इंसान को अगला जन्म कैसा मिलेगा.
इस ग्रंथ में 84 लाख योनियों का जिक्र मिलता है, जिनमें इंसानी जन्म को सबसे खास और श्रेष्ठ माना गया है. अच्छे काम करने से इंसान को ऊंचा स्थान या अच्छा जन्म मिलता है, जबकि गलत काम करने वालों को निचली योनि या नरक का सामना करना पड़ता है.
मृत्यु से पहले कैसे तय होता है अगला जन्म
गरुड़ पुराण के अनुसार इंसान के जीवन का आखिरी वक्त बहुत अहम होता है. भगवान विष्णु बताते हैं कि इंसान जिस भाव में इस दुनिया से जाता है, उसी भाव के अनुसार उसका अगला जन्म तय होता है. अगर मरते समय मन भगवान में लगा हो, विचार साफ हों और मन शांत हो, तो आत्मा को अच्छा लोक या बेहतर जन्म मिलता है. लेकिन अगर आखिरी समय में मन में लालच, गुस्सा, वासना या गलत सोच हो, तो आत्मा को नीचे की योनि में जाना पड़ता है. साथ ही पुराने जन्मों के कर्म और इस जीवन के कर्म मिलकर अगले जन्म की पूरी तस्वीर बना देते हैं.
धर्म का अपमान करने वालों को कैसा जन्म मिलता है
गरुड़ पुराण में साफ कहा गया है कि जो लोग धर्म, वेद-पुराण या भगवान का मजाक उड़ाते हैं, पूजा-पाठ से दूर रहते हैं और नास्तिकता फैलाते हैं, उन्हें अपने कर्मों का कड़ा फल मिलता है. ऐसे लोग जीवन भर सिर्फ भोग-विलास और दुनियावी सुखों में डूबे रहते हैं. पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद ऐसे व्यक्ति को कुत्ते की योनि मिलती है, जहां उसे अपमान और अभाव से भरा जीवन जीना पड़ता है.

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