
G20 की बेइज्जती नहीं भूले ट्रंप, फिर फूटा गुस्सा, साउथ अफ्रीका को दिया बड़ा झटका
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में ऐलान किया था कि कोई भी अमेरिकी अधिकारी दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा. उन्होंने इसका कारण दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा श्वेत किसानोंके साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार को बताया था.
अमेरिका और साउथ अफ्रीका के बीच इस समय ठनी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि अफ्रीका में श्वेत किसानों पर अत्याचार हो रहा है. उनका नरसंहार हो रहा है. इस वजह से ट्रंप ने साउथ अफ्रीका में हुए G20 समिट का बहिष्कार किया. अफ्रीका भी कहां चुप बैठने वाला था. राष्ट्रपति रामाफोसा ने औपचारिक तौर पर अमेरिका को जी20 की अध्यक्षता नहीं सौंपी. अब ट्रंप रह-रहकर अफ्रीका पर निशाना साध रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में होने वाली जी20 बैठक में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार अफ्रीकानर्स (डच, फ्रेंच और जर्मन बसने वालों के वंशजों) और अन्य यूरोपीय मूल के लोगों के खिलाफ हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को न तो स्वीकार कर रही है और न ही उसका समाधान कर रही है. साफ शब्दों में कहें, तो वहां गोरों की हत्या की जा रही है और उनकी जमीनें जबरन छीनी जा रही हैं. शायद सबसे बुरा यह है कि जल्द ही बंद होने वाली न्यूयॉर्क टाइम्स और फेक न्यूज मीडिया इस नरसंहार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलते. यही वजह है कि कट्टर वामपंथी मीडिया के ये झूठे और ढोंगी संस्थान बंद हो रहे हैं!
उन्होंने पोस्ट में कहा कि G20 समिट के समापन के समय दक्षिण अफ्रीका ने समिट की अध्यक्षता हमारे अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को सौंपने से इनकार कर दिया, जबकि वे समापन समारोह में मौजूद थे. इसलिए मेरे निर्देश पर दक्षिण अफ्रीका को अगले साल होने वाले 2026 के G20 सम्मेलन के लिए निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा, जिसकी मेजबानी फ्लोरिडा के महान शहर मियामी में होगी. दक्षिण अफ्रीका ने पूरे विश्व के सामने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच की सदस्यता के योग्य देश नहीं है. हम तत्काल प्रभाव से उन्हें दी जा रही सभी भुगतान और सब्सिडी बंद कर रहे हैं.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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