
EMotorad Doodle V2: आ गई फोल्डेबल E-Bike, कीमत 50 हजार से भी कम और फटाफट होगी चार्ज
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EMotorad Doodle V2 फोल्डेबल ई-बाइक के साथ रिमूवेबल बैटरी पैक दिया जा रहा है. इस E-Bike में 5 अलग-अलग राइडिंग मोड्स दिए गए हैं, जिसमें थ्रोटल, पैडल एसिस्ट, क्रूज़, वॉक और केवल पैडल मोड शामिल हैं.
इलेक्ट्रिक कारों के साथ ही देश में इलेक्ट्रिक E-Bike की भी खूब डिमांड देखने को मिल रही है. ऐसे में पुणे बेस्ड स्टार्ट-अप EMotorad ने घरेलू बाजार में अपनी नई फोल्डेबल इलेक्ट्रिक ई-बाइक Doodle V2 को लॉन्च किया है. हालांकि देखने में ये किसी साइकिल जैसी ही है, लेकिन इसका परफॉर्मेंस किसी लो-स्पीड इलेक्ट्रिक बाइक से कम नहीं है. आकर्षक लुक और दमदार इलेक्ट्रिक मोटर से सजी इस साइकिल की कीमत 49,999 रुपये तय की गई है. ये कंपनी के फ्लैगशिप मॉडल डूडल का ही नया अपग्रेडेड वर्जन है, जो कि कुछ ख़ास फीचर्स के साथ आता है.
कंपनी का दावा है कि, ये ई-बाइक सिटी राइडिंग के साथ ही एड्वेंच एक्टिविटीज के लिए भी उपयुक्त है. यहां तक कि, इसे रेतीली जमीन पर भी आसानी से दौड़ाया जा सकता है. नई Doodle V2 के डिज़ाइन में थोड़ा बदलाव करते हुए इसमें हाई-कैपिसिटी बैटरी पैक का इस्तेमाल किया गया है. इसके चौड़े फैट टायर हर तरह की सड़क पर दौड़ने में सक्षम हैं. इसके फ्रंट में बकेट अटैचमेंट के लिए चार बोल्ट और कैरियर पर भी चार बोल्ट मिलते हैं ताकि आप बास्केट को अटैच कर सकें.
बैटरी और मोटर:
इस इलेक्ट्रिक बाइक में कंपनी ने 36V 250W की क्षमता का रियर हब मोटर इस्तेमाल किया है. इसके अलावा ये ई-बाइक 10.4Ah लिथियम-आईऑन रिमूवेबल बैटरी पैक के साथ आती है. इसमें शिमोना 7-स्पीड स्पीड शिफ्टर, ऑटो कट्-ऑफ के साथ मैकेनिकल डिस्क ब्रेक और ई-ब्रेक्स भी दिए गए हैं. डबल वॉल रिम और नायलॉन के चौड़े टायर इसके परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.
कंपनी का दावा है कि ये ई-बाइक सिंगल चार्ज में 55 किलोमीटर से ज्यादा का ड्राइविंग रेंज देती है. इसकी टॉप स्पीड 25 किलोमीटर प्रतिघंटा है. 16 इंच के एल्युमिनियम अलॉय फ्रेम पर बेस्ड इस बाइक की बैटरी महज 3 घंटे में ही 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाती है. कंपनी इसके साथ लाइफ टाइम वारंटी भी प्रदान कर रही है, हालांकि इसकी कुछ शर्तें हैं जो कि आधिकारिक वेबसाइट पर साझा नहीं की गई हैं.
कैसे खरीद सकते हैं ये ई-बाइक:

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












