
Election amid Heatwave: जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी-हीटवेव और मतदान... क्या EC के पास है बेहतर मौसम में चुनाव कराने का प्रावधान?
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वर्तमान मौसमी ट्रेंड के कारण लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या साल के किसी और बेहतर मौसम में चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के पास कोई प्रावधान है? संविधान के अनुसार लोकसभा के पांच वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति पर चुनाव आयोग के पास छह माह की अवधि चुनाव कराने के लिए होती है...
भारत में इस समय ढाई महीने लंबा लोकतंत्र का उत्सव यानी लोकसभा चुनाव चल रहा है. पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं. अप्रैल में गर्मी के मौसम की शुरुआत से ही इस बार भारत में हीटवेव यानी लू चलने लगी है. सात चरणों के चुनाव में अब अहम चरण आरंभ हो रहे हैं. चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ मौसमी गर्मी भी बढ़ रही है. इस चुनावी प्रक्रिया पर भीषण गर्मी और लू का प्रभाव साफ दिख रहा है. पहले दो चरण में कम मतदान ने आयोग के साथ पार्टियों को भी चिंतित कर दिया है. मौसम और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था क्लाईमेट ट्रेंड्स के एक अध्ययन में बढ़ती गर्मी व हीटवेव के कारणों पर विस्तार से बात की गई है.
आखिर क्यों बढ़ रही है गर्मी और लू?
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पहले ही इस वर्ष अप्रैल से जून तक औसत रूप से लू वाले दिनों की संख्या दोगुनी होने की बात कही है, जिसका मतलब है कि पहले के 4 से 8 लू चलने वाले दिनों की तुलना में इस बार 10 से 20 दिन लू का प्रभाव तेज रह सकता है. साल 2023 की तुलना में यह वर्ष अधिक गर्म रहने की संभावना है. 2023 अभी तक के इतिहास में सबसे गर्म साल के रूप में दर्ज हो चुका है यानी समझा जा सकता है कि गर्मी का मिजाज इस बार क्या रहने वाला है.
देश के कुछ स्थानों पर तो अभी ही तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है जबकि अधिकांश स्थानों पर यह 42-45 डिग्री के बीच रह रहा है. अप्रैल में लू वाले दिनों की संख्या 15 तक पहुंची जो कि सबसे लंबी अवधि है. आर्द्रता से जूझते पूर्वी और जल से घिरे प्रायद्वीपीय भारतीय क्षेत्रों में तो इसका सर्वाधिक प्रभाव रहा है. केरल में रिकार्ड हीटवेव का असर है और गर्मी के कारण 10 लोगों की मौत की बात सामने आई है. केरल स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार 22 अप्रैल तक गर्मी से संबंधी परेशानियों जैसे तेज धूप, शरीर पर चकत्ते और हीट स्ट्रोक के 413 मामले सामने आ चुके हैं. ओडिशा में भी करीब 16 जिलों में गर्मी के कारण 124 लोगों को हास्पिटल में भर्ती कराने की बात सामने आई है.
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अप्रैल में प्री मॉनसून बारिश और आंधी-बारिश की कमी को तापमान बढ़ने का कारण माना जा रहा है. इसी के साथ देशव्यापी रूप से बारिश में 20 प्रतिशत तक की कमी रही है. अप्रैल 2024 में देश के दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश 12.6 मिमी हुई जोकि सन 1901 के बाद से पांचवीं सबसे कम बारिश है और 2001 के बाद से सबसे कम. इसके बाद पूर्व और उत्तर पूर्व भारत का नंबर है जहां बारिश में करीब 39 प्रतिशत की कमी रही है. आईएमडी के महानिदेशक संजय महापात्र के अनुसार ओमान, इससे सटे हुए क्षेत्रों और आंध्र प्रदेश में एंटीसाइक्लोन परिस्थितियों की निरंतर उपस्थिति के कारण मौसमी प्रक्रिया ठीक से बन ही नहीं पाई. इस कारण ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अधिकांश दिन समुद्री हवा नहीं पहुंची, जिससे जमीन से चलने वाली गर्म हवा को खुला रास्ता मिला और तापमान बढ़ा हालांकि लगातार पश्चिमी विक्षोभ से पश्चिमोत्तर के मैदानी क्षेत्र में हीटवेव का असर नहीं रहा. इसके अलावा अल नीनो के बचे-खुचे प्रभाव ने भी हीटवेव में वृद्धि की है.

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