
China Crisis: ये कैसा संकट... जिससे निकलने में ड्रैगन नाकाम, चीन की इकोनॉमी भी खतरे में!
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China Real Estate Crisis: चीन में रियल एस्टेट संकट खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. शी जिनपिंग सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी ये लगातार इकोनॉमी को चोट पहुंचा रहा है.
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन (China) एक बड़े संकट में फंसा हुआ है. शी जिनपिंग सरकार की तमाम कोशिशें भी देश को इससे उबारने में नाकाम साबित हो रही है. हम बात कर रहे हैं, चीन के रियल एस्टेट संकट (China Real Estate Crisis) की, जो बीते चार साल से ड्रैगन के गले की फांस बना हुआ है. इसका सीधा असर देश की इकोनॉमी (China Economy) पर भी लंबे अर्से से देखने को मिल रहा है.
China का ग्रोथ इंजन था ये सेक्टर कभी देश के सबसे बड़े ग्रोथ इंजन में से एक चीन का रियल एस्टेट मार्केट पिछले चार साल से ज्यादा समय से तगड़ी गिरावट के दौर से गुजर रहा है और इसमें कमी आने के कोई भी संकेत नहीं मिल रहे हैं. देश में अचल संपत्तियों की वैल्यू में लगातार गिरावट जारी है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वित्तीय संकट (Financial Crisis) से जूझ रहे परिवारों को अपनी प्रॉपर्टीज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
रियल एस्टेट कंपनियां दिवालिया! ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में पैर जमाए इस संकट का सबसे बुरा असर रियल एस्टेट कंपनियों पर दिखा है, जिनें अपने प्रोजेक्ट्स के लिए भारी कर्ज लेने पड़े हैं और ऐसे तमाम अपार्टमेंट डेवलपर्स दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए हैं. इन्हें उम्मीद थी कि Real Estate Crisis को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम कारगर होंगे, लेकिन मार्च में सरकार से जुड़े डेवलपर चाइना वैंके ने ही 2024 के लिए रिकॉर्ड 49.5 अरब युआन का सालाना घाटा दर्ज किया. इससे साफ होता है कि चीन में ये समस्या कितनी गहरी है.
Evergrande का क्या हुआ? एवरग्रैंड (Evergrande) चीन के रियल एस्टेट सेक्टर का सबसे बड़ा नाम था और इसका पतन चीन में अब तक के सबसे बड़े संकट में से एक माना जाता है. 1996 में Hui Ka Yan द्वारा स्थापित ये कंपनी एक समय तक देश का सबसे बड़ा डेवलपर था और 2017 में अपने चरम पर इसकी मार्केट वैल्यू 50 अरब डॉलर से भी ज्यादा थी. यही नहीं इसके फाउंडर और चेयरमैन एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए थे.
रिपोर्ट की मानें तो एवरग्रांडे का तेज विस्तार शुरू से ही भारी कर्ज से प्रेरित था. 2021 के अंत तक इसकी कुल देनदारियों के लगभग 360 अरब डॉलर तक पहुंचने के साथ यह अपने समकक्ष डेवलपर समूहों में सबसे अधिक कर्जदार बन गया था. इसके पतन चीन की आर्थिक ग्रोथ (China Economic Growth) को अचानक नीचे धकेल दिया. यही इसकी वजह से ही रिकॉर्ड संख्या में चाइनीज बिल्डरों के सामने संकट खड़ा हो गया. अब एवरग्रैंड ग्रुप ने हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से अपनी लिस्ट तक हटा ली है, जिससे इसके शेयर बेकार हो गए.













