
Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के दौरान घर से बाहर जाना पड़े तो क्या करें? जरूर आजमाएं ये उपाय
AajTak
Chandra Grahan 2025: 7 सितंबर 2025 को साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण लगा है. ग्रहण के समय घर से बाहर निकलना अशुभ होता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मजबूरी में इंसान को घर से बाहर निकलना पड़ता है. जाने घर से बाहर निकलने पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने के उपाय
Chandra Grahan 2025: आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग चुका है, जो भारत समेत दुनियाभर के कई देशों में दृश्यमान होगा. चंद्र ग्रहण खगोलीय, धार्मिक और ज्योतिषीय तीनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका प्रभाव न केवल वैश्विक गतिविधियों पर पड़ता है, बल्कि पूजा-पाठ और व्यक्तिगत जीवन से भी जुड़ा होता है. हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को अशुभ काल माना गया है, इसलिए इसके आरंभ से लेकर समापन तक कई परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है. मान्यता है कि ग्रहण के समय घर से बाहर निकलना उचित नहीं होता है, लेकिन यदि किसी मजबूरी के कारण बाहर जाना पड़े, तो कुछ सावधानियां जरूर अपनानी चाहिए.
ग्रहण के समय भगवान चंद्रदेव के बीज मंत्र (ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः) का जाप करना शुभ माना जाता है. यह मानसिक शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव करता है. घर से बाहर जाने की स्थिति में भी इस मंत्र का जाप करना फलदायी होता है. ऐसी मान्यता है कि इससे घर से बाहर निकलने वाले पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव कम होता है.
शुद्धिकरण करें- घर से बाहर निकलने से पहले और लौटकर आने पर घर और खुद को शुद्ध करना आवश्यक है. गंगाजल का छिड़काव सबसे प्रभावी माना जाता है.
दान करें- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके दान-पुण्य करना शुभ फलदायी होता है. यह नकारात्मक प्रभावों को कम करने का एक प्रमुख उपाय है.
क्या न करें?
यदि संभव हो तो ग्रहण के समय घर से बाहर जाने से बचें. ग्रहण के समय कैंची, सूई, चाकू आदि वस्तुओं का प्रयोग वर्जित माना जाता है. ग्रहण काल में घर के मंदिर की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए. ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए ऐसी जगहों पर जाने से बचना चाहिए.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












