
Caste based Census: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया जातिगत जनगणना का समर्थन, बोलीं- OBC मंत्रालय का भी हो गठन
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अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अपना दल (एस) हमेशा से जाति जनगणना के पक्ष में रहा है. यह देखते हुए कि ओबीसी सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है, उन्होंने उनके कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय का आह्वान किया. उन्होंने कहा, 'यह समय की मांग है.'
बिहार सरकार जाति सर्वेक्षण के आंकड़े जारी करने के एक दिन बाद बीजेपी की सहयोगी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को देशव्यापी जाति जनगणना की वकालत की और अन्य पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित एक अलग मंत्रालय की मांग की. अपना दल (एस) की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जाति जनगणना की बहुत आवश्यकता है ताकि पिछड़ी जातियों के बारे में उनकी जनसंख्या सहित प्रामाणिक आंकड़े पता चल सकें सकें और उनकी समस्याओं और मुद्दों का प्रभावी ढंग से निपटारा किया जा सके.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अपना दल (एस) हमेशा से जाति जनगणना के पक्ष में रहा है. यह देखते हुए कि ओबीसी सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है, उन्होंने उनके कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय का आह्वान किया. उन्होंने कहा, ''यह समय की मांग है.''
जाति जनगणना सार्वजनिक करने की मांग
बिहार के बाद कर्नाटक में जाति जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की डिमांड हो रही है. मध्य प्रदेश, राजस्थान में कांग्रेस वादा कर रही है कि सत्ता में लौटकर जाति गणना कराएंगे. महाराष्ट्र में कांग्रेस ने जाति गणना कराने की मांग शिवसेना-बीजेपी सरकार से की है. ये सारी कवायद इसलिए ताकि विपक्ष के मुताबिक, आबादी के हिसाब से हक तभी मिलेगा, जब आबादी का सही आंकड़ा होगा.
महाराष्ट्र में कांग्रेस ने उठाई मांग
महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सोमवार को बिहार की तरह जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की. उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे सरकार इस तरह की कवायद से बच रही है. बिहार सरकार के जाति आधारित जनगणना कराने के फैसले की तर्ज पर, महाराष्ट्र सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए. मुझे समझ में नहीं आता कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में ऐसी जनगणना कराने से क्यों बच रही है. हमारे नेता राहुल गांधी देश में जाति आधारित जनगणना कराने की लगातार मांग कर रहे हैं. विजय वडेट्टीवार ने केंद्र से तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा 2011 में किए गए जातिगत सर्वेक्षण के विवरण का खुलासा करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि 2011 की इस कवायद का विवरण गुप्त क्यों रखा गया है?

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