
BSNL ने दी Jio, Airtel और Vi को पटखनी, इस मामले में बनी टॉप टेलीकॉम कंपनी
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Jio, Airtel और Vodafone Idea ने अपने रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में इजाफा किया है. रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद बड़ी संख्या में कंज्यूमर्स ने इन टेलीकॉम कंपनियों से दूरी बनाई है. इसके साथ ही लोगों ने BSNL को जॉइन भी किया है. जुलाई महीने में सिर्फ BSNL ही एक मात्र ब्रांड रहा है, जिसके सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ी है.
इस साल जुलाई महीने में Airtel, Jio और Vi ने अपने रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में इजाफा किया था. उसके बाद सोशल मीडिया पर लोग पोस्ट कर रहे थे कि उनके पास अब सिर्फ BSNL का विकल्प बचा है. बहुत से लोग BSNL में पोर्ट कराने की बात भी कह रहे थे. अब इन सब की हकीकत सामने आ गई है.
TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने जुलाई महीने के टेलीकॉम जगत का डेटा जारी कर दिया है. इस महीने वायरलेस सब्सक्राइबर्स की संख्या में कमी आई है. जहां जून महीने में टेलीकॉम सब्सक्राइबर्स की संख्या 120.564 करोड़ थी. वहीं जुलाई महीने में सब्सक्राइबर्स की संख्या घटकर 120.517 करोड़ हो गई है.
ट्राई के डेटा की मानें तो जुलाई 2024 में सब्सक्राइबर्स बेस के मामले में सबसे ज्यादा एयरटेल को झटका लगा है. कंपनी ने 16.9 लाख ग्राहकों को खोया है. इसके बाद Vi के 14.1 लाख सब्सक्राइबर्स कम हुए हैं, जबकि Jio के 7.58 लाख सब्सक्राइबर्स कम हुए हैं.
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इसी दौरान BSNL के सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ी है. BSNL एक मात्र कंपनी है जिसने जुलाई महीने में सब्सक्राइबर्स को जोड़ा है. ट्राई की रिपोर्ट के मुताबिक, BSNL ने जुलाई महीने में 29.4 लाख मोबाइल सब्सक्राइबर्स को जोड़ा है. यानी सोशल मीडिया पर चल रहा ट्रेंड काफी हद तक सही रहा है. लोग BSNL की ओर वापस मुड़े हैं.
टेलीकॉम सर्विसेस की कीमत बढ़ने के बाद कई सर्किल में मोबाइल कस्टमर्स का बेस कम हुआ है. इसका खासा असर नॉर्थ ईस्ट, महाराष्ट्र, राजस्थान, मुंबई, कोलकाता, तमिलनाडु, पंजाब, बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्व उत्तर प्रदेश, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में देखने को मिला है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












