
Brazil: राष्ट्रपति पद पर लूला डी सिल्वा की वापसी, बोल्सोनारो को दी मात, तीसरी बार संभालेंगे सत्ता
AajTak
ब्राजील में रविवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए थे. साल 2003 से 2010 तक देश के राष्ट्रपति रह चुके लूला डी सिल्वा ने बेहद कड़े मुकाबले में बाल्सोनारो को हराकर एक बार फिर वापसी की है. बाल्सोनारो देश के मौजूदा राष्ट्रपति हैं और धुर दक्षिणपंथी माने जाते हैं.
ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी वर्कर्स पार्टी के नेता लूला डी सिल्वा ने बेहद कड़े मुकाबले में जेयर बाल्सोनारो को हरा दिया है. इसके साथ ही वह ब्राजील के अगले राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ब्राजील में रविवार को आम चुनाव के लिए मतदान हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक, इस दौरान कुल 98.8 फीसदी वोट पड़े, जिसमें से सिल्वा को 50.8 फीसदी जबकि बोल्सोनारो को 49.2 फीसदी वोट मिले. इस तरह सिल्वा को विजयी घोषित कर दिया गया.
बता दें कि लूला डी सिल्वा 2003 से 2010 के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान देश में समृद्धि बहाली का वादा किया था.
लूला 2018 का चुनाव नहीं लड़ पाए थे
सिल्वा (77) को 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में कैद की सजा सुनाई गई थी, जिस वजह से वह उस साल चुनाव नहीं लड़ पाए थे. उनकी सजा 2019 में इस आधार पर रद्द कर दी गई कि उन पर गलत तरीके से मुकदमा चलाया गया था.
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में छठी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा था. उन्होंने पहली बार 1989 में चुनाव लड़ा था. लेकिन इस बार लूला ने देश में शांतिपूर्ण क्रांति लाने की प्रतिबद्धता जताई थी.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









