
BPSC Exam Calendar 2025: बीपीएससी एग्जाम कैलेंडर 2025-26 जारी, चेक करें पूरा शेड्यूल
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BPSC Exam Calendar 2025: बीपीएससी ने 2025-26 के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है. अभ्यर्थी bpsc.bihar.gov.in से शेड्यूल डाउनलोड कर सकते हैं.
BPSC Exam Calendar 2025: बिहार लोक सेवा आयोग ने 2025 के लिए अपना परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है. अभ्यर्थी आयोग के आधिकारिक एक्स हैंडल से परीक्षा कार्यक्रम देख और डाउनलोड कर सकते हैं. सिविल असिस्टेंट इंजीनियर, असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, लोअर डिविजन क्लर्क और अन्य प्रमुख परीक्षाओं की तिथियां शामिल हैं. इंटीग्रेटेड सीसीई 70वीं के लिए प्रारंभिक परीक्षाएं 13 दिसंबर, 2024 और 4 जनवरी, 2025 को आयोजित की गई थीं, जिसके परिणाम 23 जनवरी, 2025 को घोषित किए गए थे. इसके लिए मुख्य परीक्षाएं 25-30 अप्रैल के बीच निर्धारित की गई हैं. अन्य पदों के लिए तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है.यहां चेक करें कब होगी कौन सी परीक्षा सहायक अनुभाग अधिकारी (41 पद): प्रारंभिक परीक्षा – 13 जुलाई लोअर डिविजन क्लर्क: परीक्षा तिथि (26 पद) – 20 जुलाई खनिज विकास अधिकारी (15 पद): 9, 10 अगस्त सहायक वन संरक्षक (12 पद): परीक्षा तिथि – 7 से 9 सितंबर सहायक राजस्व एवं लेखा अधिकारी (285 पद): 27 जुलाई सहायक अभियंता संयुक्त परीक्षा (568 पद): 21 से 23 जून जिला सांख्यिकी अधिकारी (47 पद): परीक्षा तिथि 3 अगस्त 70वीं BPSC CCE प्रारंभिक परीक्षा में कुल 21,581 उम्मीदवार पास हुए हैं. 70 वीं BPSC PT परीक्षा 13 दिसंबर को आयोजित की गई थी. बापू परीक्षा सभागार में रद्द की गई परीक्षा 4 जनवरी को आयोजित की गई थी. मुख्य परीक्षा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 17 मार्च को बंद हो गई थी. मुख्य परीक्षा में चार पेपर होंगे,जिसमें सामान्य हिंदी, सामान्य अध्ययन पेपर 1, सामान्य अध्ययन पेपर 2 और एक वैकल्पिक विषय का पेपर होगा. उम्मीदवारों का चयन मुख्य परीक्षा और उसके बाद के इंटरव्यू राउंड में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा. BPSC ने विभिन्न प्रशासनिक पदों के लिए कुल 2035 रिक्तियों की घोषणा की है.ये रहा कैलेंडर डाउनलोड करने का प्रोसेस

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












