
BJP के बुलावे पर भारत आएंगे इन देशों के नेता, जानें किसका-किसका नाम है शामिल
AajTak
भारतीय जनता पार्टी ने लगभग 25 वैश्विक पार्टियों को लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान को ऑब्जर्व करने के लिए बुलावा भेजा था. बीजेपी के फॉरेन अफेयर्स डिपार्टमेंट के इंचार्ज विजय चौटियावाले के हवाले से बयान जारी करते हुए पार्टी ने बताया है कि कितने देशों के नेता उसके बुलावे पर भारत आ रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा है कि दस देशों के अठारह राजनीतिक दलों के नेता उसके बुलावे पर पार्टी के चुनाव प्रचार को देखने भारत आ रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी के फॉरेन अफेयर्स डिपार्टमेंट के इंचार्ज विजय चौटियावाले के हवाले से जारी बयान में कहा गया है, "दस देशों के अठारह राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि 1 मई 2024 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा, सभी प्रतिनिधि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात करेंगे. भारत आए सभी प्रतिनिधिमंडल को पूरे चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ बीजेपी के चुनाव अभियान और रणनीतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी."
पिछले महीने ही ऐसी कई रिपोर्ट्स आई थीं जिसमें यह दावा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी ने 25 से अधिक वैश्विक पार्टियों को लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान का अनुभव लेने के लिए भारत बुलाया है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि अमेरिका की दोनों पार्टियों सत्तारूढ़ डेमोक्रेट और विपक्षी रिपब्लिकन में से किसी को भी नहीं बुलाया गया है.
बीजेपी के (KNOW BJP)' कैंपेन का हिस्सा
भारतीय जनता पार्टी ने यह कदम 'बीजेपी को जानें (KNOW BJP)' कैंपेन के तहत उठाया है. इसका मकसद पार्टी को ज्यादा से ज्यादा विस्तार देना है. इस पहल के तहत विभिन्न देशों के करीब 70 मिशन प्रमुखों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी. इसके अलावा, भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने भी कई देशों का दौरा किया है. इस आउटरीच प्रोग्राम के तहत नेपाल के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड को भी भाजपा हेडक्वार्टर में बुलाया गया था. हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी 4-5 विदेशी प्रतिनिधियों को अलग-अलग जगह चुनाव प्रचार को दिखाने के लिए ले गई थी.
अमेरिकी की पार्टियों को क्यों बुलावा नहीं?

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








