
Beef खाते हुए जकरबर्ग ने बताया बिजनेस प्लान, सोशल मीडिया पर पब्लिक ने जमकर सुनाया
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Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण सुर्ख़ियों में है. पोस्ट में मार्क ने एक तस्वीर डाली है जिसमें बीफ है. मार्क ने बताया है कि कैसे वो दुनिया के लिए टेस्टी बीफ तैयार कर रहे हैं. मार्क के इस अंदाज ने भारतीयों विशेषकर हिंदुओं की भावना को आहत किया है.
Meta से भले ही कुछ लोग अब भी वाकिफ न हों. लेकिन फेसबुक और मार्क ज़करबर्ग किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. अभी बीते दिनों ही मार्क ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट किया और भारत समेत दुनिया भर के हिंदुओं को आहत किया है. मार्क ने फेसबुक पर एक तस्वीर डाली है. तस्वीर में मार्क के सामने एक प्लेट रखी है जिसमें गौमांस या बीफ है. साथ ही एक बड़े से टुकड़े को उन्होंने मेज पर रखा और बताया है कि आखिर कैसे वो दुनिया का सबसे टेस्टी बीफ तैयार कर रहे हैं.
ध्यान रहे, मार्क ने ये पोस्ट एक ऐसे समय में किया. जब दुनिया की एक बड़ी आबादी या तो मांसाहार से तौबा कर रही है. या फिर वीगन को अपना रही है. जिक्र अगर मार्क द्वारा की गयी इस पोस्ट का हो तो मार्क ने पोस्ट में डिटेल में बताया है कि वो काउई द्वीप के को'ओलाउ रेंच में गायें पाल रहे हैं.
मार्क ने लिखा है कि.'मैं वाग्यू और एंगस नस्ल की गायों को पाल रहा हूं, और मेरा लक्ष्य दुनिया में उच्चतम गुणवत्ता वाले कुछ गोमांस बनाना है. मवेशी उनके द्वारा उगाए गए मैकाडामिया भोजन और बीयर पीते हुए बड़े होंगे.'
बताते चलें कि मैकाडामिया बादाम की एक सबसे महंगी किस्म है जिसमें भर-भर कर प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं. भले ही बादाम का ये प्रकार खासा महंगा हो लेकिन दुनिया में शौक़ीन लोगों की कोई कमी नहीं है. बाजार में बादाम की इस वैराइटी की काफी डिमांड है.
अपनी फेसबुक पोस्ट में मार्क ने ये भी बताया कि हम चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया स्थानीय और लंबवत रूप से एकीकृत हो. वहीं इसमें उन्होंने अपनी बेटियों का भी जिक्र किया और कहा कि मेरी बेटियां मैकाडामिया के पेड़ लगाने और हमारे विभिन्न जानवरों की देखभाल करने में मदद करती हैं.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












