
Assam Meghalaya Border Firing: मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान, सीबीआई करेगी जांच
AajTak
असम-मेघालय सीमा पर हुई फायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने मुआवजे का ऐलान कर दिया है. साथ ही इस केस की जांच के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस के नेतृत्व में एक आयोग का गठन कर दिया है. असम सरकार की ओर से इस केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है.
असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद को लेकर मंगलवार को हुई फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई. असम सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि जिले के एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया है और स्थानीय पुलिस व वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. अब इस केस की जांच सीबीआई करेगी. असम सरकार ने हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में कमीशन का गठन कर दिया है. ये आयोग तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा.
इस घटना में मरने वाले मेघालय के 5 लोग और एक फॉरेस्ट गार्ड शामिल है. मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा असम सरकार की ओर से दिया जाएगा. घटना कोई बड़ा रूप न ले ले, इसलिए मेघालय सरकार ने एहतियातन 7 जिलों में 48 घंटे तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी है.
फिलहाल वाहनों की मेघालय में एंट्री पर बैन
नुमल महट्टा जिले के एसपी ने बताया कि फिलहाल एहतियात के तौर पर असम और अन्य राज्यों के माल वाहक और बसों जैसे वाहनों को मेघालय में प्रवेस करने से रोक दिया गया है. मेघालय नंबर प्लेट वाले वाहनों को अनुमति दी जा रही है.
क्या था पूरा मामला

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.






