ASI सर्वे को मुस्लिम पक्ष की चुनौती, ज्ञानवापी से जुड़ी दो अहम अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे को अनुमति दे दी है. इसको लेकर मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. याचिकाकर्ता अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की लीगल टीम का कहना है कि वो शीघ्र सुनवाई के लिए शुक्रवार सुबह भी सीजेआई से आग्रह करेंगे. अर्जी में यह भी कहा गया है कि ASI सर्वे से पूरे मामले पर असर पड़ेगा. इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाई जाए.
ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की एसएलपी यानी विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी है. ज्ञानवापी सर्वे जारी रखने के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका में आशंका जताई गई है कि ASI वहां खुदाई का काम कर सकती है. वहीं सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को ज्ञानवापी मामले के सुनवाई योग्य होने को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगा.
माना जा रहा है कि उसी समय इसका भी मसला उठ जाएगा. कारण, दोनों पक्ष गुरुवार को पौने सात बजे तक कोर्ट में सुनवाई कराने को लेकर बैठे रहे. इस पर रजिस्ट्रार जनरल ज्यूडिशियल ने वकीलों से कहा कि मामला कल यानी शुक्रवार 4 अगस्त को सूचीबद्ध किया जाएगा. वकीलों से यह भी कहा गया है कि वे मामले की सुनवाई के लिए सुबह मामले का उल्लेख कर सकते हैं. इसके बाद दोनों पक्षों को वकील सुप्रीम कोर्ट से बाहर निकले.
याचिकाकर्ता अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की लीगल टीम का कहना है कि वो शीघ्र सुनवाई के लिए शुक्रवार सुबह भी सीजेआई से आग्रह करेंगे. अर्जी में यह भी कहा गया है कि ASI सर्वे से पूरे मामले पर असर पड़ेगा. इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाई जाए. याचिका में मुस्लिम पक्ष की दलील है कि वजूखाना के सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए रोक का आदेश पूरी मस्जिद पर लागू होता है, ना कि सिर्फ उस विशेष स्थान पर जहां वजूखाना स्थित है.
याचिका में कहा गया है कि ASI वहां पर भी खुदाई कर सकती है, क्योंकि ASI की टीम वहां पर खुदाई के उपकरणों के साथ पहुंची है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भी ASI की टीम परिसर के पास ही रुकी हुई है.
सुप्रीम कोर्ट में वकील निज़ाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा, "इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश पारित किया है. हमने आदेश के खिलाफ एक एसएलपी दायर की है. मैंने एक ईमेल भेजा है (तत्काल सुनवाई की मांग). उन्हें सर्वेक्षण के साथ आगे नहीं बढ़ने दें."
इस पर सीजेआई ने जवाब दिया कि वह तुरंत ईमेल देखेंगे. वहीं हिंदू पक्ष के एक पक्ष ने शीर्ष अदालत में एक कैविएट भी दायर की है, जिसमें कहा गया है कि मामले में उन्हें सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए.

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