
Aruna Shanbaug केस से कोलकाता कांड तक... 51 साल बाद भी देश के मेडिकल प्रोफेशनल सेम लड़ाई लड़ रहे हैं, जानिए बर्बरता की कहानी
AajTak
मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल की नर्स 1966 में कर्नाटक से मुंबई में नौकरी करने आई थी. अरुणा की शादी होने वाली थी. लेकिन शादी से ठीक महीने पहले 27 नवंबर 1973 को अस्पताल में उसके साथ जो हुआ, उसने सभी को हिलाकर रख दिया.
कोलकाता के RG Kar अस्पताल की ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले पर अभी तक डॉक्टर सड़कों पर हैं और इंसाफ की मांग कर रहे हैं. मामले की जांच भले ही सीबीआई को सौंप दी गई है. लेकिन लोगों का गुस्सा अभी तक शांत नहीं हुआ है. कोलकाता की डॉक्टर के साथ के साथ जिस तरह की हैवानियत हुई, ठीक उसी तरह की दरिंदगी 51 साल पहले मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल की एक नर्स अरुणा शानबाग के साथ भी हुई थी.
मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल की नर्स 1966 में कर्नाटक से मुंबई में नौकरी करने आई थी. अरुणा की शादी होने वाली थी. लेकिन शादी से ठीक महीने पहले 27 नवंबर 1973 को अस्पताल में उसके साथ जो हुआ, उसने सभी को हिलाकर रख दिया.
अस्पताल के वार्ड ब्वॉय सोहनलाल ने अरुणा का रेप किया. इस दौरान उसने कुत्ते की चेन से अरुणा का गला घोंट दिया और मरा हुआ समझकर वहां से फरार हो गया. लेकिन अरुणा ने दम नहीं तोड़ा, वह कोमा में चली गई. वह 42 सालों तक कोमा में रहीं.
अरुणा शानबाग के लिए उठी थी इच्छामृत्यु की मांग
मुंबई के जिस किंग एडवर्ड अस्पताल में अरुणा नर्स थी. उसी अस्पताल के एक कमरे में वह 42 सालों तक जिंदा लाश की तरह रही. उसकी ऐसी हालत देखकर उसके लिए इच्छामृत्यु की मांग की गई. लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया. लेकिन 2011
मार्च 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरुणा को जीना होगा. इच्छा मृत्यु की इजाजत नहीं दी जा सकती. फैसला देने से पहले कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड से उनका चेकअप करवाया था. डाक्टरों की रिपोर्ट और केईएम अस्पताल के नर्सों की दलील के बाद 7 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने उनको इच्छामृत्यु की इजाजत नहीं दी. आखिरकार 18 मई 2015 को उनकी मौत हो गई.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.








